नामजद हत्यारोपी भाइयों पर जाकर रुक गई है शक की सुई
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डौकी के नरि गांव के चर्चित बाबा एवं हिस्ट्रीशीटर मुंशीदास निषाद की हत्या के मामले में पुलिस की जांच ने बृहस्पतिवार को यू-टर्न ले लिया। शक की सुई अचानक से नामजद आरोपियों में से दो सगे भाइयों पर आकर टिक गई है। दोनों वारदात के बाद से फरार चल रहे हैं। यही पुलिस के शक का आधार है। पुलिस का सवाल है कि अगर दोनों हत्या में शामिल नहीं रहे तो घर छोड़कर क्यों भाग गए, उनकी तलाश की जा रही है। घर और रिश्तेदारी में दबिश दी गई हैं लेकिन हाथ नहीं आए हैं। इससे शक और पुख्ता हो रहा है।
बता दें, मुंशीदास के भांजे सोनू ने छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। इसमें गांव नरि के मुरारी, उनका बेटा शिवराम, जीजा जतन और जयराम के बेटे अशोक तथा राकेश को नामजद कराया गया था। इनमें राकेश और शिवराम पूठा गांव के हैं। उनके पिता जयराम की हत्या में ही बाबा मुंशीदास जेल गए थे। अन्य तीन आरोपी नरि गांव के हैं। पांच में से सिर्फ दो ही फरार हुए हैं। ये अशोक और राकेश हैं। पहले पुलिस को लग रहा था कि रंजिश के चलते इनका नाम लिखवा दिया गया है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि इनके फरार हो जाने से इन पर शक गया है। दोनों के बारे में पता चला है कि वे आपराधिक प्रवृत्ति के हैं। काफी समय पहले बाबा के साथ रहे हैं। पुलिस इस बिंदु पर पड़ताल कर रही है कि कहीं इन्होंने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए तो मुंशीदास के खून से हाथ नहीं रंगे। मुंशीदास के परिवारीजन और रिश्तेदार तो यही दावा कर रहे हैं कि इन्होेंने ही हत्या की है। पुलिस पहले इन पर शक करने के बजाय दूसरे पहलुओं पर विचार कर रही थी लेकिन इनके रवैये से जांच ने यू टर्न ले लिया। हालांकि इन पर कार्रवाई के बारे में निर्णय इनके हाथ आ जाने पर ही लिया जाएगा।