चार दिन में संपत्ति की कुर्की नहीं की, जांच ईओडब्लू को ट्रांसफर हो गई
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चेक क्लोनिंग के चर्चित केस में मुख्य आरोपी कंवलदीप सिंह पर पुलिस ने अब एक साथ दो मेहरबानी की हैं। एक तो थाना हरीपर्वत पुलिस ने कोर्ट से आदेश मिल जाने के बावजूद चार दिन में उसकी संपत्ति की कुर्की नहीं की। दूसरा इस बीच मामले की जांच अचानक आर्थिक अपराध शाखा ( ईओडब्लू) को ट्रांसफर कर दी गई। इससे पहले छह महीने से पुलिस उसकी गिरफ्तारी से बच रही थी।
बता दें, यह मामला पिछले साल जुलाई में सामने आया था। इसमें दो आरोपी बनाए गए थे। मुख्य आरोपी कंवलदीप सिंह है। उस पर आरोप है कि उसने क्लोनिंग से चेक तैयार किया। यह पुणे निवासी एनआरआई तैमूर के खाते का चेक था। इसे पंजाब एंड सिंध बैंक की घटिया स्थित शाखा में गुरुद्वारा के खाते में जमा किया गया। इसके बाद दो करोड़ रुपये निकाल लिए। चेक आईसीआईसीआई बैंक का था। दूसरा आरोपी पंजाब एंड सिंध बैंक का शाखा प्रबंधक जोरावर सिंह बनाया गया। उसकी भूमिका चेक को पास करके आईसीआईसीआई बैंक भेजने की थी। पुलिस ने जोरावर सिंह को गिरफ्तार किया। वह जमानत पर जेल से बाहर आ चुका है। उधर कंवलदीप सिंह को पकड़ने की कभी ठीक से कोशिश नहीं की गई। तैमूर ने अफसरों से शिकायत की तो उसकी संपत्ति की कुर्की के लिए कोर्ट में अर्जी दी। तब पुलिस को कोर्ट से आदेश ( धारा 83) 15 अप्रैल को मिल गया था। इसे पुलिस दबाए रही। आदेश तामील कराकर संपत्ति की कुर्की के लिए उसकेघर नहीं गई। अब मंगलवार को पुलिस ने कह दिया कि मामले की जांच ईओडब्लू को ट्रांसफर हो गई है, इसलिए कुर्की नहीं की जा सकती। आगे की कार्रवाई का फैसला ईओडब्लू को लेना है।
पुलिस की संस्तुति पर बदली जांच
आगरा। जांच बदलवाने के लिए पीड़ित एनआरआई ने दरखास्त नहीं दी थी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इसकी संस्तुति पुलिस की ओर से ही की गई है। तर्क यह दिया गया है कि एक करोड़ से अधिक रकम के आर्थिक अपराध की जांच ईओडब्लू से ही कराई जाती है। सवाल यह है कि इस पर निर्णय इतने दिन बाद क्यों लिया गया? बता दें, चेक की फोरेंसिक जांच हो चुकी है। इसमें यह साबित हो चुका है कि चेक क्लोनिंग करके बनाया गया।