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जिंदादिल इंसान, वीर योद्धा और संजीदा कवि

Thu, 21 Jan 2016 02:17 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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अनेक सिंह सिकरवार असाधारण प्रतिभाओं के धनी थे। उनके तेज दिमाग में इतिहास का खजाना था, तो भावुक दिल में संजीदा कविताओं का सागर। 11 भाषाओं पर  उनकी पकड़ थी। ‘अनजाना’ नाम से कविताएं लिखते थे। जहां भी जाते, टाइपराइटर साथ रखते। पढ़ाई-लिखाई में इतने होशियार कि  सेना में रहते सिविल सर्विसेज की लिखित परीक्षा पास की। बहादुर ऐसे कि दो युद्ध में दुश्मन का डटकर मुकाबला किया। और जब कारोबार शुरू किया तो इसमें भी कामयाबी के झंडे गाड़ दिए। जिंदादिली ऐसी थी कि  मुश्किल से मुश्किल वक्त में भी चेहरा फूल सा खिला रहता था।
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पीपलखेड़ा के जमींदार थे पिता
अनेक सिंह के पिता पूरन सिंह खेरागढ़ के पास पीपलखेड़ा गांव के जमींदार थे। उनके चार बेटों में अनेक सिंह सबसे बड़े थे। उनसे छोटे उदयवीर वन विभाग से सेवानिवृत्त हैं। तीसरे नंबर के महेंद्र पीडब्लूडी में जेई पद से रिटायर्ड हैं। सबसे छोटे रामवीर न्यू आगरा में राशन डिपो चलाते हैं। अनेक सिंह के दो बेटे ब्रजेश और सर्वेश हैं।
सेना में सूबेदार भर्ती हुए थे
अनेक सिंह 1952 में सेना में सूबेदार भर्ती हुए थे। 1962 में चीन से युद्ध के दौरान उनकी तैनाती इंफाल बॉर्डर पर थी। इसके बाद 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में हिस्सा लिया। 1975 में कैप्टन पद पर से सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद आगरा आकर रहने लगे। भारत, तुलसी, भगवान, श्री और हीरा टाकीज में मैनेजर रहे।
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फीरोजाबाद से शुरू किया पेट्रोल पंप व्यवसाय
उनके मित्र राहुल गुप्ता ने बताया कि सिनेमा घरों में मैनेजर रहने के बाद उन्होंने 1988 में फीरोजाबाद में राष्ट्रदीप नाम से पेट्रोल पंप खोला। यह खास चला नहीं, तो इसे शिफ्ट करा लिया। 1994 में एत्मादपुर में पहला पेट्रोल पंप खोला, 1996 में दूसरा और 2004 में राष्ट्रदीप नाम से ही होटल खोला।
कई काव्य संग्रह प्रकाशित हुए
सिकरवार सेना की नौकरी के दौरान जहां भी जाते, वहां के वातावरण और लोगों के व्यवहार पर कविताएं लिखते। उनके कई काव्य संग्रह प्रकाशित भी हुए। इसी दौरान उन्होंने उर्दू, पंजाबी, उड़िया, मलयालम, कन्नड़ समेत 11 भाषाएं सीख लीं। उन्होंने आर्मी में रहते सिविल सर्विसेज की लिखित परीक्षा पास की, लेकिन साक्षात्कार में कामयाब नहीं हो सके।
नजर का इलाज हो सकता है....
सिकरवार पेट्रोल पंप पर रोजाना एक नया विचार लिखते थे। इसके पीछे उनका मकसद लोगों को जिंदगी का फलसफा समझाने का होता है। उन्होंने मंगलवार सुबह लिखा था, नजर का इलाज हो सकता है, लेकिन नजरिए का नहीं।
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