झांसी के सराफ राजेंद्र अग्रवाल और राहुल कुमार का अपहरण करने वाले बदमाश पुलिस को गुमराह करना चाहते थे। उन्होंने फिरौती की शुरुआत 30 करोड़ रुपये से की। अगवा कारोबारियों से बार-बार कहा कि वे रवि पुजारी गैंग के हैं।
उनका टारगेट झांसी के कारोबारियों से 200 करोड़ रुपये की वसूली करना है। उनके निशाने पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी भी हैं। उनकी बातों से कारोबारी बुरी तरह से सहम गए थे। एसटीएफ ने मुक्त हुए कारोबारियों से लंबी पूछताछ की है। इसमें ही दोनों से जानकारी मिली है।
बदमाशों ने कहा था कि झांसी के दो और कारोबारियों का अपहरण करना है। एक विधायक को भी सबक सिखाना है। 13 दिन बदमाशों की कैद में रहे कारोबारियों को उन पर यकीन हो रहा था। जब एसटीएफ ने बताया कि यह विनोद जाट का गैंग है और विनोद बर्खास्त सिपाही है तो उनकी जान में कुछ जान आई।
उन्होंने एसटीएफ से पहला सवाल ही यह किया था कि क्या उनका अपहरण डी कंपनी के बदमाशों ने किया था। इस बारे में एसटीएफ के डीआईजी मनोज तिवारी का कहना है कि बदमाशों ने कारोबारियों को दहशत में लेने के लिए कई तरह के झूठ बोले।
कई उल्टी सीधी बातें की। यह उनके प्लान का हिस्सा था। इसी के तहत खुद को डी कंपनी का बता रहे होंगे। उनकी गिरफ्तारी हो जाने पर इस बारे में भी उनसे पूछताछ की जाएगी।