उड़ीसा के छात्रों को धक्का देकर निकाला बाहर
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केंद्रीय हिंदी संस्थान में उड़ीसा के छात्रों से गैरों की तरह व्यवहार किया गया। कोर्स की मान्यता संबंधी जानकारी करने पहुंचे छात्रों को अधिकारियों के आदेश पर सुरक्षाकर्मियों से धक्का देकर बाहर करवा दिया। तेज बारिश होने पर भी अधिकारी नहीं पसीजे और गेट पर ताला डाल दिया। इससे गुस्साए छात्र गेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की। गुरुवार को छात्रों ने संस्थान में धरना देने का एलान किया है।
संस्थान में अध्यापन शिक्षण विभाग में हिंदी शिक्षण प्रवीण कोर्स चलता है। इसे बीटीसी के समकक्ष बताया जाता है। दो वर्षीय पाठ्यक्रम में 94 छात्र हैं, जिसमें 77 उड़ीसा के हैं। छात्रों का कहना है कि इस कोर्स को उड़ीसा में मान्यता नहीं है। बीते सत्रों में यहां से पढ़कर गए छात्रों के आवेदन को रिजेक्ट कर दिए गए। इसकी जानकारी मिलने पर छात्र कुलसचिव से मिलने पहुंचे और देशभर में कोर्स के मान्यता संबंधी निर्देश दिखाने को कहा लेकिन कुलसचिव ने इससे इनकार कर दिया। साथ ही सुरक्षाकर्मियों को बुलाकर धक्का देकर सभी को बाहर करवा दिया। इसी बीच तेज बारिश होने लगी, फिर भी उन्हें अंदर नहीं आने दिया। इससे गुस्साए छात्र बाहर धरने पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की। विभागाध्यक्ष प्रो. वीना शर्मा ने इस मामले में जानकारी देने से इनकार कर दिया। और कहा कि कुलसचिव से पूछिए। इधर, कुलसचिव चंद्रकांत त्रिपाठी से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। निदेशक प्रो. एनके पांडे का कहना है कि वह आगरा से बाहर हैं, मामले की जानकारी नहीं है।
मीडिया के लिए नो एंट्री
एक बार फिर मीडिया को अंदर जाने से रोका गया। सुरक्षाकर्मियों ने गेट पर ताला डाल दिया। मीडियाकर्मियों ने इसे खोलने के कहा तो गार्ड बोले, अंदर से साहब का आदेश है। इससे पहले कथित बीफ प्रकरण में भी संस्थान प्रशासन ने ऐसा ही रुख अपनाया था।
विदेशी छात्र को थप्पड़ मारने का आरोप
संस्थान में एक अधिकारी पर अजरबेजान देश के छात्र को थप्पड़ मारने का भी आरोप है। इसकी शिकायत पीड़ित ने दूतावास में की है। बताते हैं कि हास्टल में पिछले दो दिन से बिजली-पानी बाधित है। विदेशी छात्र-छात्राएं इसकी शिकायत करने पहुंची थी। समाधान न होने पर हंगामा कर दिया। छात्राआें से बदसलूकी का छात्र ने विरोध तो उसे थप्पड़ मार दिया। बताते हैं कि शार्ट सर्किट होने से बिजली आपूर्ति नहीं हो सकी, 24 घंटे में दो घंटे ही जनरेटर चलाए गए।