आईजी (क्राइम) आरके स्वर्णकार ने शुक्रवार को पुलिस लाइन हॉल में क्राइम ब्रांच की समीक्षा की। उन्होंने पाया कि आईटी एक्ट के मुकदमों में विवेचना की रफ्तार बेहद धीमी है। इसके अलावा अनसुलझी संगीन वारदात को सुलझाने में भी ज्यादा समय लिया जा रहा है। उन्होंने इनमें तेजी लाने के लिए कहा।
उन्होंने क्राइम ब्रांच में लंबित सभी मामलों पर एक -एक कर बात की। लायर्स कालोनी में यूनिवर्सिटी लिपिक के घर पड़ी डकैती, खंदौली में बैंक में पड़े डाके और खंदारी के ग्रोवर दंपति हत्याकांड की फाइल भी देखी। इनमें से किसी भी केस का खुलासा नहीं हो पाया है। इनमें थानों की पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच को भी लगाया गया था। उन्होंने पाया कि कई उलझे मामले सुलझाए भी गए हैं। लेकिन दो मामलों पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की। एक तो लावारिस शवों की शिनाख्त नहीं हो पा रही। दूसरा आईटी एक्ट के मुकदमों की विवेचना ठीक से नहीं हो रही। इनमें तेजी लाने के लिए कहा। उन्होंने डीआईजी अजय मोहन शर्मा और एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह से कहा कि अगर क्राइम ब्रांच में संसाधनों की कमी है तो इसका प्रस्ताव बनवाकर भिजवा दें। एसएसपी ने कहा कि प्रस्ताव जल्द ही भेज दिया जाएगा।