पहले इम्तिहान में ही फेल हो गया आईजी का प्लान
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आईजी सुजीत पांडेय ने कड़ी मशक्कत कर चेकिंग का प्लान बनाया। शहर में 60 प्वाइंट बनाए गए। इन पर बैरियर लगवाए गए। उम्मीद की गई कि वारदात कर बदमाश शहर से भाग नहीं पाएंगे। जहां से भी भागने की कोशिश करेंगे, वहीं पुलिस होगी। इस योजना का पहला इम्तिहान सोमवार को हुआ। एक नहीं, तीन बार। तीनों बार में ही प्लान फेल हो गया। प्लान कागजों पर बना था, जमीन पर नहीं आ पाया।
पुलिस सोती रही। बदमाश लूट कर बड़े आराम से भाग गए। कारण यह भी रहा कि पुलिस ने 20 लाख की लूट को गंभीरता से नहीं लिया। जोर बदमाशों की तलाश में नहीं, वारदात को फर्जी साबित करने में लगाया। लूट का शिकार कर्मचारियों से सवाल पर सवाल किए गए। इसी तरह कमला नगर में सराफ को गोली मारकर लूट की घटना में पुलिस हरकत में देरी से आई। पिकेट पर तो पुलिस कर्मी थे ही नहीं। आस पास कहीं चेकिंग भी नहीं हो रही थी। यहां भी बदमाश आराम से निकल गए।
आईजी ने वारदात के बाद नाकाबंदी का जो प्लान बनाया था, उसका तो पुलिस को ध्यान ही नहीं आया। चेकिंग बैरियर अपनी जगह खड़े थे, लेकिन पुलिसकर्मी नजर नहीं आए। गुरुद्वारा गुरू का ताल, मदिया कटरा रोड, न्यू आगरा तक में चेकिंग नहीं की गई।
फिर भी दफ्तर से नहीं हिले जोन के 11 सीओ
आगरा। बदमाश भला क्यों नहीं भाग पाते जब पुलिस गंभीर ही नहीं थी। सिपाही और दरोगा की छोड़िए सीओ तक दफ्तर से नहीं निकले। आईजी का आदेश था सुबह से चेकिंग करने का। जोन में एसपी और एसएसपी ने तो इसकी परवाह की लेकिन 11 सीओ ने नहीं की। इनमें आगरा, मैनपुरी, एटा और फीरोजाबाद के सीओ शामिल हैं। आगरा के तीन हैं। सीओ हरीपर्वत, सीओ कोतवाली और सीओ बाह। आईजी ने सभी की लोकेशन चेक कराई थी। 11 सीओ दफ्तर में मौजूद मिले। जाहिर है चेकिंग कैसे होती, जब पुलिस को चेक करने वाले सीओ ही दफ्तर में बैठे थे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि आईजी ने इसे गंभीर लापरवाही माना है। सभी के खिलाफ चेतावनी पत्र जारी किया जा रहा है। संबंधित पुलिस कप्तानों को भी बताया गया है। हालांकि 20 लाख की लूट के बाद सीओ हरीपर्वत मौके पर पहुंचे थे।