अब्बू मुझे और अम्मी को गालियां देते थे, जरा-जरा सी बात पर पीटते थे, आखिर कब तक बर्दाश्त करता, कुछ दिनों से मेरा नाम नहीं लेते थे, मुझे काफिर कहकर बुलाते थे, मुझसे यह बर्दाश्त नहीं हुआ... एसएसपी कैंप कार्यालय पर प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया के सामने मुबीन ने इन्हीं अल्फाजों में जुर्म कुबूल किया।
उसने बताया कि जैसे वह ईद पर बकरे की कुर्बानी देता था, वैसे ही अब्बू के गले पर धीरे-धीरे चाकू चलाया। खून का फव्वारा छूटने के बाद वह तड़पने लगे। इसके बाद ताबड़तोड़ वार करता चला गया। बता दें, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हाजी मुईन के शव पर 35 घाव पाए गए थे। मुबीन ने बताया कि अब्बू पहलवानी करते थे, इसलिए ज्यादा वार किए। हालांकि उसने पुलिस की कहानी में दो बातों से इत्तफाक नहीं किया। उसने कहा कि कत्ल में अम्मी शामिल नहीं रहीं। दूसरा, इसकी वजह यह नहीं है कि अब्बू उसके प्रेम विवाह के खिलाफ थे। उसने बताया कि अभिनव को उसने कत्ल में साथ देने के बदले 50 हजार रुपये दिए थे। अभिनव कुलश्रेष्ठ रानीभवन, बालूगंज का रहने वाला है।
कटी नाक भी बरामद नहीं की पुलिस ने
हाजी मुईन हत्याकांड के खुलासे से एत्मादपुर थाना पुलिस की दो और बड़ी लापरवाही सामने आई। पहली स्पष्ट रूप से हत्या का मामला होने के बावजूद धारा 302 में केस दर्ज नहीं किया। दूसरी, हाजी मुईन की कटी नाक उसी सूटकेस में थी, जिसमें उनका शव मिला, लेकिन पुलिस ने उसे बरामद नहीं किया। मुबीन के बताने पर थाना ताजगंज पुलिस ने इसे बरामद किया है। बता दें, एत्मादपुर थाना पुलिस ने शव का फोटो भी जिले के अन्य थानों को नहीं भेजा था। हैरानी की बात यह है कि अफसरों ने इस लापरवाही पर कोई एक्शन भी नहीं लिया है।
मोबाइल ने खोल दी कातिलों की पोल
हाजी मुईन के शव की शिनाख्त होते ही पुलिस ने उनके मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाई। उनकी पत्नी चांदनी बेगम और बेटा मुबीन कह रहा था कि वह बंगलूरू गए थे लेकिन उनके मोबाइल की आखिरी लोकेशन उनके घर की ही आई। इसके बाद उनके बेटे और पत्नी की लोकेशन चेक की गई, तो पता चला कि वे लखनऊ गए थे। जबकि उन्होंने बताया था कि दरगाह देवा शरीफ गए थे। इसी से झूठ पकड़ा गया। पूछताछ हुई तो रहस्य से पर्दा उठ गया।
हाजी मुईन की हत्या में उनका बेटा, पत्नी और बेटे का दोस्त शामिल पाए गए हैं।
डा. प्रीतिंदर सिंह, एसएसपी
कत्ल की कहानी
- 17 मई : हाजी मुईन की घर में ही सोते समय हत्या कर दी गई।
- 18 मई : सुबह चार बजे एत्मादपुर में उनका शव मिला, तब शिनाख्त नहीं हुई थी।
- 18 मई : उनकी पत्नी, बेटा और बेटे का दोस्त लखनऊ चले गए।
- 21 मई : पुलिस ने शव को लावारिस में सुपुर्द ए खाक कर दिया।
- 24 मई : ताजगंज में उनकी पत्नी चांदनी बेगम ने गुमशुदगी दर्ज कराई।
- 26 मई : बंगलूरू के उद्यमियों ने बताया, वे वहां नहीं पहुंचे हैं।
- 29 मई : अमर उजाला में उनका फोटो देखने के बाद शिनाख्त हुई।
- 30 मई : कॉल डिटेल से पता चला कत्ल में परिवारीजन शामिल हैं।
- 31 मई : हत्याकांड का खुलासा, तीनों आरोपी गिरफ्तार किए गए।