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वर्दी में डकैती: इंस्पेक्टर ललित पर शिकंजा कसेगी जीआरपी, हो सकती है संपत्ति की जांच

Fri, 17 May 2019 03:29 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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जीआरपी आगरा का इंस्पेक्टर ललित त्यागी
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सहारनपुर डकैती कांड में जेल गए इंस्पेक्टर ललित कुमार त्यागी की संपत्ति की भी जांच हो सकती है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस तरह की जानकारी मिली है कि ललित ने और भी वारदात की हैं। इसमें मोटा माल हाथ लगा है। 
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ऐसे मामलों में आय से अधिक संपत्ति की जांच कराई जाती है। जीआरपी के अधिकारियों का कहना है कि डकैती की चार्जशीट लगने का इंतजार है। इसके बाद विजिलेंस जांच की सिफारिश की जाएगी। कई बार ऐसे मामलों में शासन खुद भी जांच के आदेश दे देता है।

सहारनपुर के नागल की डकैती का मास्टरमाइंड जिस बशीर को बताया जा रहा है, वो पहले से गिरोह चला रहा था। उसका गिरोह आगरा के मंटोला थाना से जेल भी गया था। अब बशीर के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाई गई तो इसमें लगभग रोजाना ही इंस्पेक्टर ललित कुमार त्यागी, सिपाही रिंकू और शायर बेग के नंबर मिले हैं।
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रिंकू और शायर अभी गिरफ्तार नहीं हो पाए हैं। शक यह पैदा हो रहा है कि या तो बशीर को संरक्षण देकर अपराध कराया जा रहा था या फिर नागल डकैती की तरह और भी वारदात में इंस्पेक्टर ललित और उसकी टीम शामिल रही। 
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शाही अंदाज में रहता था आरोपी

जीआरपी के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि ललित का शाही अंदाज पहले से ही अफसरों की आंखों में खटक रहा था लेकिन सुबूत न होने के कारण उस पर कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। अब जैसे ही नागल थाना पुलिस उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल करेगी, वैसे ही उसकी संपत्ति की जांच शुरू हो सकती है। 

उसके इस कारनामे पर विभागीय जांच के आदेश पहले ही हो चुके हैं। पुलिसवालों को अपनी संपत्ति की घोषणा हर साल करनी होती है। यह देखा जाएगा कि ललित ने घोषणा की या नहीं। इसके लिए शपथ पत्र देना होता है।

चार्जशीट के बाद होगी आरोपियों की बर्खास्तगी 

जीआरपी के अधिकारियों ने डकैती के मामले में आरोपी इंस्पेक्टर ललित त्यागी और दोनों सिपाहियों की बर्खास्तगी का मन बना लिया है लेकिनइसमें जल्दबाजी नहीं की जाएगी। तुरंत कार्रवाई का फायदा आरोपी उठा लेते हैं। 

ऐसे कई मामले हो चुके हैं जिनमें बर्खास्तगी के बाद बहाली करनी पड़ी। इस मामले में आरोपियों को नोटिस जारी किया जाएगा। उनका जवाब लेने के बाद कार्रवाई की जाएगी ताकि उन्हें यह कहने का मौका न मिले कि उनका पक्ष नहीं सुना गया। 
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