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जालसाजी के पीड़ितों को केस वापसी की धमकी

Sat, 31 Oct 2015 01:19 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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तीन दर्जन मुकदमों में नामजद शैलेंद्र अग्रवाल की जालसाजी के शिकार लोगों को अब केस वापस लेने के लिए धमकी दी जा रही हैं। आरोप है कि उसका ससुर सतीश अग्रवाल उन्हें ऐसा न करने पर फर्जी केस में फंसाने की धमकी दे रहा है। इससे दहशत में आए इन लोगों ने न केवल एसएसपी से शिकायत की है, बल्कि कार्रवाई न होने पर छह नवंबर से भूख हड़ताल की चेतावनी दी है। इनका यह भी आरोप है कि अपनी पहुंच के दम पर सतीश अग्रवाल अब और केस दर्ज नहीं होने दे रहा है।
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एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह से मिलने के बाद इन लोगों ने बताया कि मथुरा निवासी शैलेंद्र का ससुर और सपा नेता सतीश चंद अग्रवाल की शासन तक पहुंच है। इसी के चलते पुलिस अन्य नामजद आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही है। इनमें वह खुद भी शामिल है। उसके अलावा आठ और मुल्जिम हैं।
पीड़ितों का आरोप है कि सतीश चंद अग्रवाल कह रहा है कि या तो केस वापस लो या फिर फर्जी मुकदमे झेलने को तैयार रहो। अगर इससे भी बात न बनी तो जान से मरवा दिया जाएगा। पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने नामजद आरोपियों पर कार्रवाई के लिए चार नवंबर तक का समय दिया है। पांच को डीएम से मिलेंगे।
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अगर पुलिस प्रशासन इसी तरह हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता है तो पांच नवंबर से कलक्ट्रेट में भूख हड़ताल की जाएगी। इन लोगों में रवि बंसल, अवधेश त्यागी, मनोज गोयल, विनय बंसल, दीपक बंसल, सुरेश चंद अग्रवाल, उमेश वर्मा, अनिल जैसवाल, आलोक गर्ग, नीरज अग्रवाल शामिल रहे।
तहरीर दो, कार्रवाई होगी
एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह ने पीड़ितों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जिसकी भी एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही है, वह तहरीर और साक्ष्य लेकर उनके पास आए, तुरंत मुकदमा लिखवाया जाएगा।
खसरा-खतौनी दिखाई, फिर भी रिपोर्ट नहीं हो पाई
जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल को बचाने के लिए पुलिस अब एफआईआर तक नहीं लिख रही है। उसके खिलाफ तहरीर लेकर पहुंच रहे पीड़ित लोगों को चक्कर लगवाए जा रहे हैं। आयकर में फंसाने का डर भी दिखाया जा रहा है। हद तो तब हो गई, जब एक पीड़ित से पुलिस ने खेत की खसरा-खतौनी लेकर आने के लिए कहा।
शैलेंद्र के भाई नितेंद्र की गिरफ्तारी के बाद सैंया के लच्छीपुरा गांव निवासी अवधेश त्यागी को लगा कि शायद अब पुलिस का रवैया बदल गया है। इससे पहले पुलिस ने उसकी तहरीर नहीं ली थी। वह एसआईटी आफिस में केस दर्ज कराने पहुंचा था। उसने आलू में निवेश के नाम पर 13 लाख की धोखाधड़ी की तहरीर दी।
उसका आरोप है कि एसआईटी के एक अधिकारी ने उससे पूछा, तुम्हारे पास 13 लाख रुपये कैसे आ गए। इसका कोई साक्ष्य है या नहीं? उसने बताया कि पैसा आलू बेचकर मिला था, तो अफसर ने उससे इसकी रसीद मांग ली। वह अगले दिन कोल्ड स्टोर की रसीद लेकर पहुंचा तो अफसर ने नया सवाल कर दिया। कहा, तुम्हारे खेत में 13 लाख का आलू कैसे पैदा हो गया? क्या तुम्हारे पास इतना खेत है। उसने कहा कि जाओ खेत की खसरा खतौनी लेकर आओ। अगर, खेत तुम्हारे नाम नहीं मिला, तो एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।
अवधेश का कहना है कि वह खसरा खतौनी लेकर भी पहुुंच गया। लेकिन, रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। उससे सवाल किया गया कि प्रति बीघा कितना आलू पैदा हुआ? किस दर पर बेचा गया? कोल्ड स्टोरेज ने चेक के बजाय कैश क्यों दिया? इसके बाद उससे कह दिया कि पहले जांच होगी, तब एफआईआर।
उसने बताया कि आठ दिन हो गए, अभी तक रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। वह अब एसएसपी के पास तहरीर लेकर जाएगा। जालसाजी के शिकार रवि बंसल, पुष्पेंद्र सिंह और अतुल गर्ग ने बताया कि अवधेश त्यागी जैसे और भी कई लोग हैं, जिनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा रही है।
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