करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामलों में शैलेंद्र अग्रवाल के परिवारीजनों के खिलाफ कार्रवाई करने में पुलिस के हाथ बंध गए हैं। पंचम तल से मिली ‘ताकत’ के कारण जहां पुलिस के कदम ठिठक गए हैं, वहीं स्थानीय अफसर उच्च न्यायालय के संभावित जवाब मांगने से डरे हुए हैं। आरटीआई कार्यकर्ता और चर्चित आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर ने इस मामले में याचिका दायर की हुई है।
मूल रूप से मथुरा निवासी आलू कारोबारी और कोल्ड स्टोर मालिक शैलेंद्र के खिलाफ 36 मुकदमे कायम हो चुके हैं। 13 में से चार आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं, बाकी फरार हैं। शैलेंद्र की हिस्ट्रीशीट खोली जा चुकी है।
उस पर गैंगस्टर एक्ट भी लग चुका है। लेकिन इन मुकदमों में नामजद उसके परिवार के तमाम लोग पुलिस की पकड़ से दूर हैं। इसका कारण पंचम तल के एक पावरफुल अफसर दंपति का वरदहस्त बताया जाता है।
इस दंपति तक पहुंच बनाने में हरियाणा कनेक्शन काम आया है। पंचम तल के पावर सेंटर तक पहुंचाने में भूमिका निभाई सत्तारूढ़ पार्टी के एक नेता ने। मूल रूप से हरियाणा निवासी यह नेता संगठन की युवा टीम से जुड़ा है।
नेताजी की नाराजगी के चलते एक बार इसे बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। बाद में कुछ शीर्ष नेताओं के हस्तक्षेप के चलते पार्टी में वापसी भी हो गई थी और अफसरशाही में धमक भी।
इस युवा नेता की पश्चिमी यूपी के सियासी गलियारे और अफसरशाही में तूती बोल रही है। खासतौर से ब्रज क्षेत्र में इसकी मर्जी के बगैर कोई काम नहीं होता। कई अफसरों के तबादले और तैनाती में भी इसका हाथ बताया जाता है।
इस नेता की मथुरा के मामलों में काफी दखल है। अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए इसने मथुरा को ही बेसकैंप बना लिया है। इसी नेता ने शैलेंद्र अग्रवाल को सुरक्षा कवच दिया है। बताया जाता है कि इस नेता ने हरियाणा कनेक्शन जोड़ा और पंचम तल ले जाकर जालसाज के रिश्तेदारों को मिलवाया।
पंचम तल से आए फोन के कारण ही अफसरों के तेवर फिर से ठंडे पड़ गए जालसाज के भाई नितेंद्र अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद अफसरों को पंचमतल से झाड़ पिलाई गई। उधर अफसरों की बेचैनी हाईकोर्ट को दिए जाने वाले जवाब को लेकर भी है। इस बात की पुष्टि आज पीड़ितों की प्रेस कांफ्रेंस से भी हुई है।