रंगा, बिल्ला, नीरज और कामेश उर्फ चीनी। इन चारों भाइयों ने जरायम की दुनिया में ऐसे कदम रखा कि पूरा ‘गुंडा गैंग’ बना डाला। इनके गैंग में मौजूदा समय में दस से भी ज्यादा बदमाश जाते हैं। गैंग मकान और जमीनों पर कब्जे करके पैसा वसूलता। रंगा और बिल्ला तो आतंक का पर्याय बन चुके हैं।
पहले गैंग की कमान मुकेश उर्फ बिल्ला के हाथ में थी। वर्ष 2015 में तौले बाबा की हत्या में बिल्ला नामजद था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस हत्या में राकेश उर्फ रंगा और नीरज को भी नामजद किया गया था लेकिन पुलिस रंगा और नीरज को गिरफ्तार ही नहीं कर पाई थी। बिल्ला के जेल जाने के बाद गैंग की कमान रंगा के हाथ में आ गई थी।
पुलिस का कहना है कि रंगा का गैंग मथुरा के साथ ही आसपास के जनपदों में भी सक्रिय था। दूसरे जनपदों से भी इस गैंग का क्रिमिनल रिकार्ड मांगा जा रहा है। शहर के व्यापारी रविकांत बंसल से भी इस गैंग ने लाखों की लूट की थी। उस वारदात में राकेश उर्फ रंगा, मुकेश उर्फ बिल्ला समेत पांच नामजद किए गए थे। जेल से छूटने के बाद रंगा-बिल्ला की जोड़ी का आतंक और बढ़ गया।
साल 2011 में भोलेश्वर चतुर्वेदी की गोली मारकर हत्या कर रंगा-बिल्ला ने दहशत फैला दी थी। इस हत्याकांड में रंगा-बिल्ला, छोटा भाई नीरज, पिता बालस्वरूप समेत पांच के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई गई थी। कई अन्य मुकदमों में भी रंगा-बिल्ला का पिता बालस्वरूप भी नामजद रहा है। लूट और चोरी की मोटरसाइकिलों की बिक्री भी इस गैंग ने की है। सराफा हत्या-लूटकांड में भी चोरी की मोटरसाइकिलों का प्रयोग किया गया।