इसी फैक्टरी के पास के बाडे़ में अवैध कट्टी खाना भी चलाया जा रहा है। पुलिस के पहुंचने पर फैक्टरी और कट्टी खाने में भगदड़ मच गई। कट्टी खाने से लोग भाग निकले। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की। उन्होंने बताया कि यह कई वर्षों से चल रहा है।
कई साल से चला रहे थे फैक्टरी
फैक्टरी संचालक चांद बाबू पुत्र अज्जो, शैफी पुत्र गुड्डू, इरशाद पुत्र इकबाल और ताहिर पुत्र साबिर निवासी मोहल्ला व्यापारियान को गिरफ्तार किया गया। इन्होंने बताया कि ये लंबे समय से यही काम कर रहे हैं। पुलिस ने इनसे पूछताछ कर रही है। इन्हें बुधवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
कट्टीखाना संचालक हाथ नहीं आया
कट्टीखाना चला रहे शल्लो पुत्र स्वालीन और शोहिल पुत्र स्वालीन फरार हो गए। एसओ ने बताया कि उनकी तलाश की जा रही है। उनकी गिरफ्तारी के बाद आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। कट्टीखाने में कई लोग काम कर रहे थे।
पुलिस के मुताबिक नकली घी बनाने की फैक्टरी चला रहे चांद बाबू ने पूछताछ में बताया कि वह छलेसर के कट्टी खाने से जानवरों के सींग और चर्बी टेंपो से रात में मंगाता था। सींग, खुर और चर्बी को भट्ठी पर पिघलाकर घी तैयार करते थे। यहां से फिरोजाबाद और सिकंदराराऊ के व्यापारी उनसे माल ले जाते थे।
23 रुपये किलो में होता है तैयार, 200 में बिकता है
आरोपी चांद बाबू ने पुलिस को बताया कि छलेसर कट्टी खाने से चर्बी 18 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदता है। घी तैयार करने में कुल 23 रुपये प्रति किलोग्राम का खर्च आता है। जिसे वह व्यापारियों को 60 रुपये प्रति किलोग्राम बेचता है। यही घी व्यापारी डालडा में मिलाकर 200 प्रति किलोग्राम तक में बेचते हैं।
फिरोजाबाद का घी और शाहगंज का व्यापारी ले जाता है हड्डी
आरोपी चांद ने बताया कि वह घी के साथ जानवरों की हड्डी का भी कारोबार करता है। चर्बी से बना घी फिरोजाबाद और सिकंदराराऊ के व्यापारी ले जाते हैं, तो हड्डी को आगरा शाहगंज का एक व्यापारी उससे खरीद कर ले जाता है। चांद हड्डी बगल में चल रहे कट्टी खाने और कई दूसरी जगहों से खरीदकर बेचता था।