इससे पहले दो दिन तक एसआईटी आरोपों के घेरे में आए अफसरों के खिलाफ
साक्ष्य जुटाने में लगी रही। केस डायरी में परचे भी फटाफट लिखे जा रहे थे।
लग रहा था कि उनके खिलाफ तमाम सुबूत कोर्ट के सामने रखे जाएंगे लेकिन अब
कहानी बदल गई है। बता दें, सीबीआई की टेक्निकल विंग में डिकोड किए गए
शैलेंद्र के एसएमएस से खुलासा हुआ था कि दो तत्कालीन डीजीपी ने दरोगाओं की
पोस्टिंग के लिए सात लाख और प्रमोशन के लिए 20 लाख का रेट तय किया था। अगले
ही दिन आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने दावा किया कि सात लाख का रेट तत्कालीन
डीजीपी एसी शर्मा और 20 लाख का तत्कालीन डीजीपी एएल बनर्जी ने तय किया गया
था। इनके अलावा एक और पूर्व डीजीपी, दो आईएएस और एक आईजी के कनेक्शन
शैलेंद्र से मिले। पुलिस सूत्रों ने बताया कि एसआईटी की रिपोर्ट चार दिन
पहले ही शासन को भेजी गई थी। इसके बाद ही दागी अफसरों को बचाने की तैयारी
शुरू हुई।
पुलिस अधिकारी अब कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। उच्च पदस्थ
सूत्रों का कहना है कि शैलेंद्र पर 28 केस दर्ज हैं, इसलिए चार्जशीट भी कई
होंगी। पहली चार्जशीट में उसके अलावा, उसके ड्राइवर और प्राइवेट
सिक्योरिटी गार्ड को आरोपी बनाया जाएगा। इसके बाद जांच ईओडब्लू को सौंपी जा
सकती है।
अब हाईकोर्ट का ही सहारा
आगरा। करोड़ों रुपये गंवा
चुके लोगों की नजर अब हाईकोर्ट पर लग गई है। अधिवक्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट
नूतन ठाकुर ने इस मामले की सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ
में याचिका दाखिल की है। इस पर 16 जून को सुनवाई होनी है। दरअसल, इस प्रकरण
की अगर निष्पक्ष जांच हो गई तो शासन-प्रशासन के शीर्ष अफसरों के अलावा
सत्ता चला रहे तमाम राजनेताओं की करतूतों का भी खुलासा हो सकता है।