मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट डायल 100 से पुलिस की छवि ही नहीं सुधरेगी बल्कि पुलिसकर्मियों की घर के पास ड्यूटी करने की मुराद भी पूरी होगी। जी हां। डायल 100 के लिए बार्डर स्कीम के नियम शिथिल कर दिए गए हैं। इस योजना में तैनाती पाने वाले पुलिसकर्मी तीन साल तक गृह जनपद के सीमावर्ती जनपद में तीन साल तक ड्यूटी कर सकेंगे। इसका शासनादेश जारी कर दिया गया है।
11 जुलाई, 1986 के शासनादेश के तहत पुलिसकर्मियों के गृह जनपद की सीमा से लगे जनपद में तैनाती प्रतिबंधित है। वर्ष 2010 और 2011 में इसका सख्ती से पालन कराया गया था। तब सिपाहियों और दरोगाओं के बड़े पैमाने पर तबादले हुए। तब से ऐसे हजारों पुलिसकर्मी हैं, जो घर के पास नौकरी करने की मुराद मन ही मन लिए हैं लेकिन पूरी नहीं हो पा रही। अब डायल 100 ने इन्हें मौका दिया है।
इसके लिए पुलिसकर्मियों को एसएसपी के पास प्रार्थना पत्र देना होगा कि वह डायल 100 में गृह जनपद के पास तैनाती चाहता है। इस पर शासन से निर्णय लिया जाएगा कि वह किस जनपद में तैनात किया जाए। इसमें सिर्फ अराजपत्रित पुलिसकर्मी ही प्रयास कर सकते हैं।
आगरा में 20 अक्तूबर से होगी शुरुआत
पुलिस इमरजेंसी प्रबंधन प्रणाली (पीईएलएस) यानी डायल 100 को शुरू किए जाने की तैयारी चल रही है। आगरा समेत दस जनपदों में इसे 20 अक्तूबर से शुरू किया जाएगा। आगरा के अतिरिक्त इलाहाबाद, बरेली, मुरादाबाद, गोरखपुर, कानपुर नगर, झांसी, लखनऊ, वाराणसी और मेरठ शामिल हैं।
26 सितंबर से होगा प्रशिक्षण
इसके लिए प्रशिक्षण 26 सितंबर से शुरू किया जाएगा। पेट्रोलिंग वाहनों में तैनात कर्मचारियों का प्रशिक्षण 18 दिन का होगा। फायर ब्रिगेड और पुलिस रेडियो प्रणाली के कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। डायल 100 की एक और खूबी यह है कि इसमें पुलिस को घटनास्थल खोजने में समय नहीं लगेगा। लखनऊ कंट्रोल से मैसेज के साथ एक लिंक मिलेगा। यह गाड़ी में ड्राइवर के सामने लगी स्क्रीन पर खुलेगा। इस पर क्लिक करते ही घटनास्थल तक का पूरा नक्शा सामने होगा।