झोलाछाप के इलाज से नगला छिद्दा में चार साल के बच्चे की मौत हो गई। मौत की सूचना मिलते ही झोलाछाप दुकान बंद कर भाग गया। परिवारीजनों ने दुकान पर जमकर हंगामा किया। पुलिस ने पहुंचकर मामला शांत कराते हुए बच्चे का पोस्टमार्टम कराया है।
लंगडे़ की चौकी स्थित नगला छिद्दा निवासी मजदूर चंद्रभान के बेटे कुणाल (चार वर्ष) दो दिन से बुखार से पीड़ित था। इसका इलाज पास ही चौराहा पर स्थित झोलाछाप महेंद्र कुमार कर रहा था। परिवारीजन मंगलवार की सुबह महेंद्र के पास दवा लेने गए। चंद्रभान ने बताया कि बुखार में आराम न मिलने की बात झोलाछाप को बताई थी, इस पर बोला दवा बदल दी है, एक डोज के बाद बच्चे को आराम मिल जाएगा। घर जाकर दवा खिलाने के पांच मिनट बाद ही कुणाल बेहोश हो गया।
वह उसे झोलाछाप के पास लेकर पहुंचे तो उसने दी हुई वापस ले ली और एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी ले जाने को कह दिया। वहां पहुंचे तो डाक्टरों ने जांच के बाद बताया कि कुणाल की मौत हो चुकी है। झोलाछाप दुकान बंद कर भाग गया। बच्चे के बड़े भाई सनी ने बताया कि झोलाछाप समझौते का दबाव बना रहा है। उसने दुकान घर में ही बना रखी है। अब घर पर भी ताला लगा है। परिवारीजनों ने हंगामा भी किया। सीएमओ डा. बीएस यादव ने बताया कि जांच के लिए एसीएमओ को कहा है। झोलाछाप की दुकान सील करने के साथ ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डिग्री न रजिस्ट्रेशन, इलाज में काट रहे चांदी
दुकान पर हरा पर्दा और प्लस का लाल निशान और बन गए डाक्टर। झोलाछाप इसी तरह दुकान चला रहे हैं। एक दिन की खुराक यह 30 से 50 रुपये में बना देते हैं। इसके चलते निम्न वर्ग के लोग बीमार होने पर सबसे पहले यहीं पहुंचते हैं। स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी के चलते झोलाछाप मरीजों की जान से खेल रहे हैं। बावजूद स्वास्थ्य विभाग झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई की सुध नहीं ले रहे। हालत ये है कि विभाग ने गर्मी शुरू होने से पहले इनको चिह्नित करना भी मुनासिब नहीं समझा।