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मथुरा: जवाहरबाग प्रकरण में रामवृक्ष के कमांडर चंदन बोस को पांच साल की सजा

Mon, 28 Jan 2019 05:31 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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मथुरा के जवाहरबाग कांड के मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव के प्रमुख सहयोगी रहे चंदन बोस को अदालत ने पांच साल के कारावास की सजा सुनाई है। चंदन बोस पर जवाहर बाग में आलू खोद रही महिला उद्यानकर्मी से छेड़छाड़ का आरोप था। चंदन बोस के साथ हरनाथ पर भी निर्णय सुनाया जाना था, लेकिन नैनी जेल से वह कोर्ट में हाजिर नहीं हो सका।      
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15 मार्च 2016 को जवाहर बाग के तथाकथित आंदोलनकारियों ने आलू खोद रहे उद्यानकर्मियों से बंधक बनाकर मारपीट की थी। इस मामले में 21 जनवरी को अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन-2 द्वारा 43 अभियुक्तों को सजा सुनाई गई थी। उस दिन चंदन बोस फतेहपुर जेल तथा हरनाथ नैनी जेल से कोर्ट में हाजिर नहीं हुए थे। 

दोनों पर निर्णय सुनाए जाने के लिए कोर्ट ने 28 जनवरी की तिथि तय की थी। सोमवार को भी कोर्ट में फतेहपुर जेल से केवल चंदन बोस ही आ सका। उस पर उद्यानकर्मी महिला से छेड़छाड़ का आरोप था। कोर्ट ने चंदन बोस को छेड़छाड़ के मामले में पांच वर्ष के कारावास तथा पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। 
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नैनी जेल से मांगा जवाब

निर्णय देने वाले न्यायाधीश अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन-2 जहेंद्र पाल सिंह ने हरनाथ को नैनी जेल में निर्णय सुनाने के लिए कान्फ्रेंस का प्रयास भी किया, लेकिन वह संभव नहीं हो सका। कोर्ट ने इस संबंध में नैनी जेल के अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा है। हरनाथ का निर्णय सुनाने के लिए चार फरवरी तिथि नियत की है। 

बचाव पक्ष के अधिवक्ता एलके गौतम ने बताया कि वह पूरे निर्णय को लेकर जिला जज की कोर्ट में अपील करेंगे। वहीं अभियोजन अधिकारी सतेंद्र पाल सिंह ने बताया कि चार फरवरी को हरनाथ की सजा पर निर्णय सुनाया जाएगा।    
        
हरनाथ पहले भी रहा है गैर हाजिर            

हरनाथ नैनी जेल जाने के बाद से करीब एक वर्ष तक कोर्ट से गैरहाजिर रह चुका है। इस संबंध में कोर्ट के सख्त रुख के बाद ही हाजिर हुआ था। अब सजा पर निर्णय के लिए कोर्ट में हाजिर नहीं होने के बाद कोर्ट सख्त रुख अपना सकता है। 
           
चंदन बोस हुआ परेशान            

कोर्ट में चंदन बोस को जब निर्णय सुनाया गया तो वह परेशान हो उठा। जानकारी रहे आलू खोदाई प्रकरण में 45 अभियुक्तों में से सिर्फ चंदन बोस पर ही छेड़छाड़ का आरोप है और सर्वाधिक सजा भी उसी को मिली है। निर्णय के बाद से जवाहर बाग के अन्य आरोपियों की भी कोर्ट का निर्णय सुनने के बाद हालत खराब हो गई थी। जेल में उनका रक्तचाप बढ़ गया था।
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