वायरल फीवर लोगों का काल बन गया है। एक के बाद एक जिले में करीब 40 मौत हो गई हैं। शनिवार को भी पांच और मरीजों ने दम तोड़ दिया। लगातार मौत होने से लोग दहशतजदां हैं। बावजूद, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन चैन की नींद में है। मरीजों की शिकायत पर गांवों में कैंप लगाकर इलाज नहीं दिया जा रहा। कागजों पर ही फॉगिंग और एंटी लारवा का छिड़काव हो रहा है। गांवों के हालात जानने के लिए जिला प्रशासन के किसी अधिकारी ने भी जहमत नहीं उठाई है।
शनिवार को एसएन मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग में अछनेरा के अरदाया निवासी भर्ती छह साल के कृष्णा ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने बताया कि डाक्टरों ने इसे डेंगू बताया गया था। देरशाम आगरा में ही अछनेरा के सांधन गांव के देवेंद्र सिंह पुत्र मेंबर सिंह की बुखार से मौत हो गई। बाह में जैतपुर के गांव पाठकपुरा में छह दिन से बीमार रेखा (35) पत्नी रूपेश विधौलिया ने आगरा में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। यहां कई घरों में फीवर के मरीज हैं। सीएचसी जैतपुर के अधीक्षक डा. ब्रजेश कुमार की टीम पारना गांव पहुंची। कैंप लगाकर मरीजों का इलाज किया। टीम में डा. संजीव, मनोज पचौरी, संजय, रामदास आदि शामिल थे।
पिनाहट के गांव रीठई में मटरेलाल (50) चार दिन से बुखार से पीड़ित थे। पास के ही झोलाछाप से इलाज करा रहे थे। शनिवार को उनकी मौत हो गयी। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में बड़ी संख्या में लोग बीमार हैं। स्वास्थ्य विभाग से शिकायत करने पर भी कैंप नहीं लगाया गया।
फतेहपुर सीकरी के ग्राम जौताना में हरमुख कुशवाह के पुत्र अमित सिंह (7) को कई दिन पूर्व बुखार आया था। दो दिन पूर्व उसे भरतपुर ले जाया गया। वहां शुक्रवार को जयपुर ले जाते समय उसकी मौत हो गई। कस्बा के मुड़िया खेरा निवासी महेन्द्र सिंह (65) को बुखार आने पर आगरा एसएन में भर्ती कराया गया। वहां उन्हें डेंगू होने बताया गया है।
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- सीएचसी प्रभारियों को गांवों में कैंप लगाने के निर्देश दिए हैं। अगर ऐसा नहीं किया जा रहा तो उसकी शिकायत करें। कई क्षेत्रों में एंटी लारवा छिड़काव कराया जा रहा है।
- डा. बीएस यादव, सीएमओ
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तीन डेंगू, छह मलेरिया के मरीज भर्ती
एसएन मेडिकल कालेज के डेंगू वार्ड में 25 मरीजों का इलाज चल रहा है। इसमें तीन डेंगू, छह मलेरिया और एक चिकनगुनिया का मरीज है। बाकी की रिपोर्ट आनी बाकी है। डेंगू वार्ड प्रभारी डा. मृदुल चतुर्वेदी ने बताया कि सभी की हालत ठीक है। ठीक होने के बाद मरीजों को डिस्चार्ज भी किया जा रहा है।
दिन 12 बजे ही बंद हो जाता सीएचसी पिनाहट
पिनाहट। सीएचसी पिनाहट की हालत खस्ता है। यहां अस्पताल खुलने के कुछ समय बाद भी बंद हो जाता है। इसके चलते मरीजों को उपचार तक नहीं मिल पा रहा है। शनिवार को गांव पडुआपुरा में करंट से झुलसे एक व्यक्ति को परिजन सीएचसी ले गए लेकिन वहां इमरजेंसी सेवा पर ताला लगा मिला। परिजनों ने परिसर में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की तलाश की लेकिन कोई नहीं मिला। अस्पताल में अव्यवस्थाओं और लापरवाह स्टॉफ के चलते ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। बाद में वे आगरा चले गए।
बता दें कि इन दिनों क्षेत्र में बीमारियों का प्रकोप चल रहा है। जिले भर में रोजाना बुखार से मरने वालों की सूचनाएं आ रही हैं लेकिन सीएचसी पिनाहट पर डाक्टर और स्वास्थ्य कर्मी लापरवाह बने हुए हैं। हालत यह है कि अस्पताल दोपहर 12 बजे ही बंद कर दिया जाता है। इसके बाद न कोई डॉक्टर मिलता है और न स्वास्थ्य कर्मी। शनिवार को पडुआपुरा निवासी भूरी सिंह (50) करंट लगने से बेहोश हो गए। परिवारीजन उन्हें लेकर सीएचसी पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला। उनके पुत्र बंटू सिंह का आरोप है कि इमरजेंसी वार्ड के अलावा अन्य वार्डों में ताले लगे थे। वहां न कोई डॉक्टर मिला न स्वास्थ्य कर्मचारी। कुछ ही देर में पहुंचे ग्रामीणों ने वहां जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां इमरजेंसी वार्ड तो कभी खुलता ही नहीं है। दो साल से रात के समय इमरजेंसी सेवा के लिए कोई डॉक्टर नहीं देखा। इसके चलते लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से रात के समय डॉक्टरों की तैनाती की मांग की है। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन की धमकी दी है।
इस संबंध में एसीएमओ वीरेंद्र भारती से बात की गई तो वे अपना पल्ला झाड़ते नजर आये। इनका कहना था कि परिसर में कोई न कोई डॉक्टर उपस्थित रहता है। इसकी जानकारी चिकित्सा प्रभारी से की जा सकती है। जबकि चिकित्सा प्रभारी से संपर्क नहीं हो सका।