पांच जनवरी से अपहृत बिट्टू का सातवें दिन भी कोई सुराग न मिलने पर उसके परिवार का पुलिस से भरोसा उठने लगा है। इन लोगों ने पुलिस अफसरों से दूरी बनाना भी शुरू कर दिया है। थाना पुलिस से भी संपर्क नहीं कर रहे। इसके चलते माना जा रहा है कि उनके पास फिरौती का फोन आ गया है। हालांकि वे इससे साफ इंकार कर रहे हैं। शुरू में बिट्टू के परिवारीजन पुलिस के साथ दबिश में भी जा रहे थे। बच्चे की तलाशी के अभियान में पुलिस टीमों के साथ रेलवे स्टेशनों पर भी गए। लेकिन एक एक कर छह दिन बीत जाने के बाद इनकी पुलिस से उम्मीद कम हो गई है। परिवार के करीबी सूत्रों का कहना है कि ये लोग चाहते हैं कि कैसे भी बिट्टू मिल जाए। एक एक दिन बीतने के साथ इतनी बेचैनी बढ़ती जा रही है। इन्हें इस पर जरा भी संदेह नहीं रह गया है कि उसका अपहरण फिरौती के लिए किया गया है। उसकी बरामदगी के लिए फेसबुक पर चलाए गए अभियान से 2000 लोग जुड़ चुके हैं, फिर भी उसका कुछ पता नहीं चला है। थानों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों के साथ ही सैंकड़ों वाहनों पर उसकी गुमशुदगी के पंफलेट और फोटो लगाए गए, लेकिन कोई फायदा न हुआ। पुलिस की छह टीमें इतना तक मालूम नहीं कर पाई हैं कि उसका अपहरण किस गिरोह ने किया है। पुलिस की तरफ से यह भी साफ नहीं है कि उसे रंजिश में उठाया गया है या फिर फिरौती के लिए। उधर, बिट्टू की सकुशल बरामदगी के लिए महिलाएं लगातार मंदिर में भजन-कीर्तन कर रही हैं।