आगरा। हाईवे पर खौफ की वजह सुरक्षा की कमी के साथ अंधेरा भी है। शहर के बाहर ही नहीं, भीतर भी लाइटें खराब पड़ी हैं। कुछ इलाका तो इतना डरावना है कि रात में चलने में बहुत डर लगता है। बदमाश अंधेरे का फायदा भी उठा रहे हैं। सबसे ज्यादा अंधेरा एनएच-2 पर है। यहां आगरा-मथुरा रूट की रोडवेज बस चलाने वाले हाथरस के सासनी निवासी ड्राइवर राजकुमार का कहना है कि छलेसर, कीठम, खंदारी पर हाईवे पर लाइटें लगी तो हैं लेकिन जलती नहीं है। आगरा के नामनेर निवासी अनिल टूरिस्ट टैक्सी चलाते हैं। उनका कहना है कि मथुरा की तरफ टोल प्लाजा को छोड़ दें तो कहीं भी लाइटें जलती नहीं मिलती। हालांकि मथुरा की सीमा में रिफाइनरी के आस पास काफी रोशनी रहती है लेकिन आगरा में अंधेरा ही अंधेरा है। रात में डर लगता है। हाईवे से सटे कमला नगर में 19 मार्च को सराफ रामकुमार की हत्या रात के समय की गई थी। वहां अंधेरा था। हाईवे पर भी अंधेरा था। बदमाश इसका फायदा उठाकर भाग गए थे।
सफर में ध्यान रखिए
अंधेरे और सुनसान जगह पर कभी गाड़ी मत रोकिए, हो सकता है बदमाश वारदात की फिराक में हों।
लखनऊ एक्सप्रेस वे पर वाहन कम हैं, सड़क सुनसान रहती है, आबादी वाली जगह में ही रुकिए।
अगर कहीं पर कार में कुछ टकराने की आवाज आए तो रुकिए मत, आप एक्सल गैंग के निशाने पर हो सकते हैं।
अगर कार के शीशे पर ठक ठक की आवाज आए तो गेट मत खोलिए, यह ठकठक गैंग की हरकत हो सकती है।
अगर लघु शंका आदि के लिए रुकना पड़े तो टोल प्लाजा पर या पुलिस बूथ केपास ही गाड़ी रोकिए।
सभी महकमों की अलग अलग जिम्मेदारी है। पुलिस सुरक्षा का काम कर रही है। लाइटें ठीक कराने की जिम्मेदारी जिन जिन महकमों पर है, उन्हें इसका निर्वहन करना चाहिए - दिनेश चंद दुबे, एसएसपी।
एनएच-2 और जयपुर हाईवे पर आगरा क्षेत्र में लाइटों की जिम्मेदारी विकास प्राधिकरण पर है। जो लाइटें खराब हो जाती हैं, उन्हें ठीक कराया जाता है। अगर फिर से खराब हो गई हैं, तो मरम्मत कराई जाएगी -शिवराज सिंह, मुख्य अभियंता आगरा विकास प्राधिकरण
हाईवे पर चल रहे कार्यों को पूरा करने के बाद तीन चार माह में प्रकाश स्तंभ को पुन: एनएचएआई लगवाएगा। ज्यादातर शहरी इलाकों में हाईवे पर प्रकाश व्यवस्था संबंधित शहरी निकाय करते हैं। -मोहम्मद शफी, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई