मैनपुरी। बिना गिरफ्तारी वारंट के युवक को जेल भेजना कोतवाली प्रभारी को मंहगा पड़ा है। प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय ने कोतवाली प्रभारी से बिना गिरफ्तारी वारंट के युवक को जेल भेजने के संबंध में स्पष्टीकरण मंागा है। कोतवाली प्रभारी के कृत्य के संबंध में एसपी को पत्र भी लिखा गया है। न्यायाधीश के आदेश पर युवक को जेल से रिहा कर दिया गया है।
मोहल्ला पुरोहिताना निवासी संदीप मिश्रा का अपनी पत्नी उमा से विवाद चल रहा है। परिवार न्यायालय में चल रहे भरण पोषण के मुकदमे में एक पक्षीय आदेश में 65664 रुपये का रिकवरी वारंट जारी किया गया। दो सितंबर को कोतवाली प्रभारी समरेश सिंह तथा कैलाश आश्रम चौकी प्रभारी मनीष चिकारा ने संदीप के घर पहुंचे।
उसको लिखापढ़ी करने के बाद रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। मजिस्ट्रेट ने उसको जेल भेज दिया। संदीप के अधिवक्ता अजय कृष्ण पांडेय ने प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर कोतवाली पुलिस पर दूसरे पक्ष से मिलकर बिना गिरफ्तारी वारंट के युवक को जेल भेजने की शिकायत की।
प्रधान न्यायाधीश रेनू राव ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के बाद उन्होंने आदेश में लिखा 23 अगस्त को संदीप के खिलाफ 65664 रुपये की रिकवरी का वारंट जारी करके सुनवाई के लिए 19 सितंबर तय की थी। न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी अथवा बिना जमानती वारंट जारी नहीं किया गया था।
न्यायाधीश के आदेश पर उसको जेल से रिहा किया गया। कोतवाली प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगने के साथ ही उनके कृत्य के संबंध में एसपी को पत्र लिखा गया है। सुनवाई के लिए 19 सितंबर तय की गई है।