आगरा। शहर में एक कंपनी द्वारा पांच साल में रकम दोगुना करने का झांसा देकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी का एक और मामला सामने आया है। कंपनी के निवेशक भटकने को मजबूर हैं। कंपनी के दफ्तर पर ताला लग चुका है। छह पीड़ितों ने थाना हरीपर्वत पुलिस में शिकायत की है।
बल्केश्वर के राधा नगर निवासी जेनरेटर पार्ट्स के कारोबारी मुकेश खंडेलवाल ने शिकायत में कहा है कि 2011 में कोलकाता (पश्चिम बंगाल) की प्रिज्म इंफ्रा कोन लिमिटेड कंपनी का आफिस संजय प्लेस में खुला था। इसके हेड पूरन चंद उर्फ डाक्टर राजेंद्र से उनकी मुलाकात थी।
पूरन ने बताया कि कंपनी में निवेश करने पर 12 प्रतिशत ब्याज देती है। फिक्स डिपाजिट और आरडी (आवर्ती जमा) पर पांच साल में रकम को दोगुना करती है। कंपनी का हेड आफिस कोलकाता में हैं। इस पर उन्होंने अपने और 60-70 परिचितों के तीन करोड़ कंपनी में लगा दिए। कंपनी में अन्य लोगों ने इसी तरह रकम लगाई थी। कुछ लोगों का भुगतान भी किया गया। इससे लोगों को भरोसा हो गया।
एफडी और आरडी की समय सीमा पूरी होने पर कंपनी टालमटोल करने लगी। नवंबर 2016 में नोटबंदी के दौरान कंपनी ने निवेशकों का पैसा वापस करने से इनकार कर दिया। लोगों ने हेड आफिस में संपर्क किया, वहां से भी आश्वासन दिया जाने लगा। तीन माह पहले कोलकाता का आफिस बंद हो गया। दो माह पहले संजय प्लेस आफिस बंद कर दिया गया। मुकेश खंडेलवाल ने शनिवार को थाना हरीपर्वत में शिकायती पत्र दिया।
शिकायत में शंभूदयाल (कमला नगर) के पांच लाख, मुरारीलाल (राधा नगर) के 42 हजार रुपये, अनूप अग्रवाल (कमला नगर) के चार लाख, विजय अग्रवाल (बल्केश्वर) के 4.5 लाख, स्मिता अग्रवाल के 1.5 लाख और अनुज खंडेलवाल (बल्केश्वर) के 3.5 लाख रुपये जमा कराने की बात कही गई है। आरोप है कि साजिश के तहत लोगों का रुपया हड़प लिया गया है।
इंस्पेक्टर थाना हरीपर्वत जयकरण सिंह ने बताया कि प्रिज्म इंफ्रा कोन लिमिटेड और उससे जुड़े लोगों पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए शिकायत की है। मामले की जांच संजय प्लेस चौकी इंचार्ज को दी गई है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
उधर, हाल ही में पिनकॉन कंपनी की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। इस कंपनी के निवेशक भी मुकदमा दर्ज कराने के लिए भटक रहे हैं। कंपनी के निदेशक को पिछले दिनों राजस्थान पुलिस आगरा से गिरफ्तार करके ले गई थी।
इंटरनेट पर भी कंपनी की जानकारी
इंटरनेट पर कंपनी की जानकारी दी गई थी। कंपनी बंगलूरू में बीयर बनाती है। इसके अलावा एक कंपनी को बीयर बनाने के लिए मिनरल वाटर की सप्लाई भी करती है। कोलकाता में रियल एस्टेट का कारोबार भी है। इन सबके बारे में इंटरनेट पर जानकारी उपलब्ध थी। इसे देखने के बाद ही एजेंटों और निवेशकों ने भरोसा जताया था।
अखबार में नहीं दिया था विज्ञापन
कंपनी ने अखबार में विज्ञापन नहीं दिया था, इसमें एजेंट बनाए गए थे। एजेंट ही निवेशकों को लेकर आते थे। कंपनी ने आगरा में ही 70 से 80 एजेंट बनाए हैं। अब वह भटकने को मजबूर हैं।