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पर्यावरण और वन मंत्रालय में अहम होगी आज की बैठक

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फिरोजाबाद। टीटीजेड में तमाम बंदिशों से जूझ रहे कांच उद्योग के लिए पर्यावरण मंत्रालय कहीं नई मुसीबत न बढ़ा दे। उद्योग जगत की नजरें बुधवार को आयोजित होने वाली पर्यावरण मंत्रालय की बैठक पर टिकी हैं।
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कांच उद्योग तमाम मुसीबतों से जूझ रहा है। बाहरी संगठनों द्वारा पर्यावरण मंत्रालय, एनजीटी, टीटीजेड अथॉरिटी में लगातार शिकायतें की जा रही हैं। इनके आधार पर टीटीजेड अथॉरिटी ने जनवरी-15 से नए उद्योगों पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया है। कांच इकाइयों को क्षमता विस्तार करने से भी रोक दिया। करोड़ों रुपये का सेटअप लगाने के बाद उद्यमी कांच इकाइयां चालू कराने को लखनऊ से दिल्ली से दौड़ लगा रहे हैं। कई बार जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा चुके हैं लेकिन अभी तक कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला।

इधर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बुधवार को अहम बैठक बुलाई है, जिसमें मंडलायुक्त सहित कई अफसर प्रतिभाग करेंगे। पर्यावरण मंत्रालय ने बैठक का अजेंडा भी बता दिया है, जिससे विस्तार से चर्चा होनी है। इनमें सबसे अहम बिंदु गैस की खपत, प्रदूषण के आंकड़े व क्षमता विस्तार को माना जा रहा है।
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क्षमता विस्तार करने वाले इकाइयां मंत्रालय के निशाने पर
पर्यावरण मंत्रालय की बैठक में क्षमता विस्तार करने वाली इकाइयां निशाने पर रहेंगी। सूत्रों का कहना है कि वर्ष 1996 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आगरा-फिरोजाबाद में संचालित इकाइयों को छह लाख घनमीटर गैस उपलब्ध कराई गई, जो वर्तमान में बढ़कर करीब 16 लाख घनमीटर तक पहुंच चुकी है।

अधिक गैस मिलने का परिणाम यह हुआ कि कई छोटी इकाइयां क्षमता विस्तार कर बड़ी इकाइयों की श्रेणी में शामिल हो गईं। पर्यावरण मंत्रालय तक भी इसकी शिकायत हो चुकी हैं, जिसमें 60 इकाइयों द्वारा क्षमता विस्तार करने की शिकायत की गई है। इनमें अधिकांश वह इकाइयां हैं, जिन्होंने गैस मिलने के बाद कांच उत्पादन के साथ शराब की बोतल बनाना शुरू कर दिया। कांच की बोतल उद्योग को बंद लगातार को लगातार प्रयासरत है।
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