फिरोजाबाद। हरियाणा के पानीपत जिले के थाना समालखा क्षेत्र के झट्टीपुगांव स्थित होटल स्वर्णमहल से उद्योगपति संजीव गुप्ता को बरामद करने के बाद पुलिस ने अपहरण को संदिग्ध भी बता दिया और एसपी सिटी को इसकी विवेचना देकर संजीव गुप्ता को बड़ी कानूनी कार्रवाई से ने केवल बचाया बल्कि मामले पर लीपापोती की आधारशिला ही रख दी।
लोग अब खुलकर कह रहे हैं कि संजीव गुप्ता का अपहरण नहीं हुआ था। उसका रचा नाटक था। इसके बाद भी पुलिस ने मामले की जांच का हवाला देते हुए संजीव को परिवारीजनों के सुर्पद कर दिया। प्रेस कांफ्रेस में भी संजीव गुप्ता रोते हुए ड्रामा करता नजर आया। भाजपा के एक प्रमुख नेता ने पुलिस की इस कार्यशैली से शासन को अवगत करा दिया है।
22 जुलाई को हाईवे स्थित सागर रत्ना रेस्टोरेंट से अपने घर आर्चिट ग्रीन आते समय उद्योगपति संजीव गुप्ता लापता हुए थे। 23 जुलाई को संजीव गुप्ता की पत्नी सारिका गुप्ता ने थाना टूंडला में तीन लोगों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में उस वक्त सनसनी फैल गयी जब सारिका गुप्ता के मोबाइल पर 100 करोड़ की फिरौती का मैसेज आया। यह मैसेज संजीव गुप्ता के मोबाइल से शहर के तमाम लोगों को ब्राडकास्ट किया गया।
गृह सचिव ने मामले का संज्ञान लेते हुए एसटीएफ आगरा , क्राइम ब्रांच और साइबर सेल की टीम को उद्यमी को बरामद करने लगाया। छानबीन के दौरान संजीव गुप्ता की लोकेशन कभी एनसीआर, कभी चंडीगढ़ और कभी श्रीनगर में मिली। तलाश में जुटी टीमों को यह समझते देर न लगी कि संजीव गुप्ता खुद गायब हो गया है।
लगातार परिवारीजनों के संपर्क में है। 27 जुलाई को आईजी जोन अशोक जैन ने एसएसपी के साथ दो घंटे तक सारिका गुप्ता से पूछताछ कर भांप लिया कि अपहरण कोरा ड्रामा है। सारिका गुप्ता पर पुलिस नेे शिकंजा कसा तो संजीव की लोकेशन शुक्रवार को पानीपत में मिल गई।
आगरा एसटीएफ ने नोएडा एसटीएफ की मदद ली। पानीपत स्थित होटल स्वर्ण महल की घेराबंदी थाना समालखा पुलिस को साथ लेकर की गई। यहां संजीव गुप्ता को बरामद कर लिया गया। संजीव ने इस होटल में शरण ले रखी थी। फिरोजाबाद पुलिस रात दो बजे संजीव को पुलिस लाइंस लेकर आयी।
एसएसपी अजय कुमार ने अपहरण के इस ड्रामे का खुलासा शनिवार को जिस अंदाज में किया वह चौंकाने वाला है। संजीव गुप्ता को रात भर पुलिस लाइंस में रखा गया। पुलिस ने सुबह तक संजीव को समझा दिया कि मीडिया के सामने क्या-क्या बोलना है।
प्रेस कांफ्रेंस शुरू होने पर पत्रकारों ने जब संजीव गुप्ता से सवाल किए तो वह अपने अपहरण की कहानी बताने की बजाय एसएसपी का गुणगान करने लगा। सवाल होता अपहरण कैसे हुआ? जवाब में वह कभी एसएसपी कभी एसओजी तो कभी एसटीएफ की तारीफ करने लगता। संजीव की बातचीत का अंदाज बता रहा था कि रात को पुलिस ने उस पर थर्ड डिग्री का भी इस्तेमाल किया है। पुलिस खुलासे के माहौल से लग रहा था कि पुलिस के आला अधिकारी संजीव के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं।
चूंकि पूरे शहर की नजर पुलिस के खुलासे पर लगी थी इसलिए दोपहर तक यह बात फैल गयी कि संजीव गुप्ता अपहरण का नाटक करने के बाद भी जेल नहीं पुलिस कस्टडी में सम्मान के साथ घर भेजा गया है। भाजपा के एक नेता ने डिप्टी सीएम डा.दिनेश शर्मा को अवगत कराने के साथ गृह सचिव को अवगत कराया कि 100 करोड़ की फिरौती के ड्रामे से सरकार की किरकिरी हुई है।
पुलिस ने अपहरण की नौटंकी करने वाले बीसी संचालक संजीव गुप्ता को अभयदान दे दिया। जबकि सच यह है कि संजीव गुप्ता पर बीसी से जुड़े लोगों का करीब तीस से 40 करोड़ तक रुपया है। कर्ज में फंसे होने और हर तरफ से पैसों का दबाव बनने पर वह खुद चला गया था। नाटक अपहरण का किया। इस बीच वह जहां-जहां गया महंगे होटलों में रुका और पूरी ऐश की। नाटकीय अंदाज में पानीपत से बरामद हो गया।