फिरोजाबाद (शिकोहाबाद)। शिकोहाबाद के औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्री में आतिशबाजी में विस्फोट की घटना के बाद भी उद्योग और प्रदूषण विभाग मानकों की अनदेखी का संज्ञान ले रहा। जांच के नाम पर खानापूरी का नतीजा आतिशबाजी में विस्फोट के रूप में सामने आया है। खास बात यह है कि इलाके में अब भी प्रतिबंधित केमिकल बनाने का काम चल रहा है।
शिकोहाबाद के औद्योगिक क्षेत्र में सूर्या बीड्स नाम से संचालित फैक्ट्री में आतिशबाजी डेढ़ साल से बन रही थी। दूसरे जिलों के मजदूर और चाइना का नागरिक आतिशबाजी बनवा रहा था।
डेढ़ महीने पहले उद्योग विभाग ने फैक्ट्री का निरीक्षण किया था, लेकिन अधिकारियों को फैक्ट्री में आतिशबाजी नजर नहीं आई। ऐसे म्रें उद्योग विभाग की अनदेखी साफ बताती है कि किस तरह से जांच के नाम पर खानापूरी की गई थी।
पचास औद्योगिक इकाईयों वाले शिकोहाबाद के औद्योगिक क्षेत्र में करीब बीस फैक्ट्रियां वर्तमान में चल रहीं हैं। कुछ फैक्ट्रियों में प्रतिबंधित केमिकल केडमियम सल्फेट बन रहा है।
एक महीना पहले डीएम से शिकायत के बाद दो फैक्ट्री सीज की गई थी। 12 प्रकार के केमिकल मिला कर बनाए जाने वाले केडमियम सल्फेट में चार केमिकल हानिकारक और ज्वलनशील हैं।
इन फैक्ट्रियों से निकला पानी नालियों में बहने और भूजल प्रदूषित होने से कैंसर जैसी बीमारी फैला सकता है। इन उद्योगों पर उद्योग विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का ध्यान नहीं है।
औद्योगित क्षेत्र में जिन भूखंडों पर उद्योग चलने चाहिए वहां चार-चार गेस्ट हाउस चल रहे हैं। विस्फोट की घटना के दौरान मौके पर पहुंचे शिकोहाबाद के विधायक डा. मुकेश वर्मा ने डीएम के सामने आपत्ति उठाई थी। और तो और उद्योगों के लिए बने पार्को को पार्किंग और दावत के पंडालों के रुप में प्रयोग किया जा रहा है।