एटा। रस्सी का सांप बनाने की आदत पुलिस की पुरानी है। इसी आदत के चलते अलीगंज पुलिस के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक की गर्दन फंस गई है। पीड़ित ने डीजीपी कार्यालय में शिकायत करके मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। लखनऊ से डिप्टी एसपी स्तर से की गई प्राथमिक जांच में पुलिस फंस गई है। वहंी क्राइम ब्रांच आगरा और सीओ सकीट की जांच में भी अलीगंज पुलिस के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक दोषी पाए गए हैं।
थाना अलीगंज में अपराध संख्या 419/16 तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक सतीश कुमार की ओर से धारा 5/25 के तहत शस्त्र फैक्ट्री चलाने के आरोप में अभियोग दर्ज कराया गया था। मामले में मंतोष उर्फ अवधेश, रामवीर, रामसनेही, विवेक, अनूप राजू और करू सहित सात को आरोपी बनाया गया था। विवेक की गिरफ्तारी मौके से दिखाई गई।
वहीं अन्य फरार दिखाए गए। मामले की निष्पक्ष जांच कराने के लिए संतोष के भाई परतोष पुत्र सुरेश चंद्र निवासी ग्राज जहान नगर थाना राजा का रामपुर की ओर से डीजीपी से गुहार लगाई गई। मामले की जांच हुई तो पुलिस की झूठ को सच बनाने की असलियत सामने आ गई। जांच में पाया गया कि दिव्यांग रामवीर, जो एक पैर से चल नहीं पाता था, उसे पुलिस ने भागा दिखाया।
वहीं मंतोष उर्फ अवधेश घटना स्थल से 40 किमी दूर कायमगंज में एटीएम से रुपये निकालने का साक्ष्य प्रस्तुत कर चुका था। जांच अधिकारियों ने कई अन्य साक्ष्यों को भी जुटाया। इसके बाद घटना को रूप देने की कहानी खुलने लगी। जांच रिपोर्ट के बाद दोषी पाए गए पुलिस कर्मियों की गर्दन फंसती जा रही है। मामले में जल्द ही दोषी पुलिसकर्मियों पर गाज गिर सकती है।
मंतोष के भाई परतोष ने मामले की शिकायत डीजीपी से की थी। जिसके बाद डीजीपी स्तर से डिप्टी एसपी लखनऊ ओपी शर्मा को भेजकर कराई गई। इसके बाद 23 मई 2017 को जांच आईजी आगरा को भेजी गई। यहां से क्राइम ब्रांच आगरा ने जांच शुरू की।
इस जांच में तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक सतीश कुमार को दोषी पाया गया। इसके पश्चात सीओ सकीट रामनिवास की ओर से जिला स्तर पर भी जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में भी तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अलीगंज सतीश कुमार दोषी बताए गए हैं।