कमजोर पुलिसिंग ने मथुरा को क्राइम बेल्ट बनाकर रख दिया। साल 2018 में हत्या, लूट, डकैती और दुष्कर्म की वारदात से पूरा जिला दहलता रहा। कई मामलों में विधानसभा से लेकर विधान परिषद तक में मथुरा का क्राइम गूंजा।
यहां महिलाओं के साथ बढ़ता अपराध बताता है कि पुलिस पूरी तरह से फेल है। चाहे मंत्री की गैस एजेंसी के पैसे की लूट का मामला हो या मंत्री के रिश्तेदार की हत्या का.., क्राइम का ग्राफ कम नहीं हुआ। विदेशी युवती के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने तो मथुरा को सात समुंदर पार तक बदनाम कर दिया।
एक मासूम बच्चे की पुलिस की गोली से जान चली गई थी। इसमें जांच बैठी लेकिन हुआ कुछ नहीं। पुलिस अधिकारी तो बदलते रहे लेकिन एक दो को छोड़कर वह मथुरा का क्राइम कंट्रोल करने में पूरी तरह से फेल साबित हुए।