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पकड़ा खेल: एसडीएम समिति की जांच में जूते-मोजों का सैंपल फेल

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एटा। मैनपुरी और कासगंज के बाद अब एटा में भी परिषदीय बच्चों को वितरित होने वाले जूते-मोजे जांच में फेल हो गए। जिला जांच समिति की आपत्ति के बाद इन्हें लैब टेस्टिंग को भेजने की तैयारी है। टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर आपूर्ति संस्था पर जुर्माना निर्धारित करने सहित अन्य कार्रवाई की जाएगी।
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परिषदीय बच्चों को मिलने वाले सामान की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल सही साबित हो रहे हैं। उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला समिति द्वारा विभिन्न विकास खंडों में हर साइज के जूते-मोजों की रेंडम सैंपल जांच में जूते का तला पतला एवं कमजोर पाया गया। वहीं मोजे की गुणवत्ता खराब बताई गई है। सभी विकास खंडों में एक ही कंपनी द्वारा की गई एक जैसे माल की आपूर्ति के बाद अन्य विकास खंडों की जांच में भी इसकी पुष्टि हुई है। खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा जांच आख्या रिपोर्ट जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेज दी गई है। वहीं जांच समिति द्वारा जिलाधिकारी को भी रिपोर्ट प्रेषित कर दी गई है। बीएसए के अनुसार उक्त सैंपल को शासन द्वारा निर्धारित प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा। यहां से मिलने वाली गुणवत्ता रिपोर्ट के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी मिली थी शिकायतें
पूर्व में भी मिले जूते एक माह एवं मोजों के एक दिन में ही फटने की शिकायतें रहीं थीं। लेकिन जांच रिपोर्ट में कोई आपत्ति न मिलने से कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिले के 1927 स्कूलों में पंजीकृत 1.43 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क जूते मोजे वितरित करने के आदेश हैं। इनमें 67783 छात्र एवं 75370 छात्राएं शामिल हैं। पूर्व वर्षों में नि:शुल्क पुस्तकों में खराब प्रिंट, बाइंडिंग आदि की शिकायतें आम रहीं हैं।
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मई में ही आ गया था स्टॉक
मई माह में मिले जूते मोजे ब्लाक संसाधन केंद्रों पर रखवाए गए हैं। जिला समिति की जांच व सत्यापन के बाद इन्हें स्कूलों में भेजकर वितरण होना था। उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति में बीडीओ व एई आरईएस भी शामिल हैं। जबकि पूर्व समिति में तहसीलदार व खंड शिक्षा अधिकारी भी नामित सदस्य थे।
समिति की जांच रिपोर्ट के बाद सैंपल को लेब टेस्टिंग को भेजा जा रहा है। यहां निर्धारित गुणवत्ता के आधार पर भुगतान कटौती एवं जुर्माना निर्धारित किया जाएगा।
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संजय कुमार शुक्ल, बीएसए
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