आंकड़ों में भी झोल
प्रशासन के आंकड़ों में भी झोल है। उस पर हेराफेरी के आरोप लग रहे हैं। जिन मरीजों की मौत अप्रैल के अंतिम सप्ताह में हुई थी उनकी डेथ रिपोर्ट शासन के पोर्टल पर 20 से 25 दिन बाद अब दर्ज की गई। पिछले 48 घंटे में प्रशासन ने 19 मौतें दर्ज की हैं, जबकि बीते 24 घंटे में एसएन में किसी संक्रमित ने दम नहीं तोड़ा है।
ताजनगरी में 25 से 30 अप्रैल तक ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा रहा। तब 19 मरीजों की मौत हो गई। इनकी रिपोर्ट अब सामने आई हैं। बुधवार को प्रशासन ने नौ मरीज और बृहस्पतिवार को दस मरीजों की मौत बताई है। यानी 48 घंटे में 19 मौतें सार्वजनिक की गई हैं।
जबकि पिछले दस दिनों में संक्रमण में जबर्दस्त गिरावट आई है। अस्पतालों में ऑक्सीजन संकट नहीं है। बहुत कम मरीज मिल रहे हैं। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि जब दूसरी लहर अपने चरम पर थी तब इतनी मौतें नहीं हुई तो अब कैसे हो रही हैं।