दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से टूटी सांस
दूसरी लहर में कोरोना वायरस ने हाहाकार मचा दिया। अप्रैल से जून तक संक्रमण ने कहर बरपाया। सरकारी अस्पतालों समेत 40 निजी कोविड अस्पतालों में बेड फुल रहे। ऑक्सीजन के लिए मारामारी रही। इसकी कमी से कई मरीजों की सांस टूटी। हृदय को झकझोर देने वाले दृश्य भी रहे, जिसमें ऑटो में ही बिना ऑक्सीजन के मरीज ने दम तोड़ दिया।
22 मरीजों की मौत का सच नहीं आया सामने
दूसरी लहर में भगवान टॉकीज स्थित श्रीपारस हॉस्पिटल का अप्रैल में वीडियो वायरल हुआ, जिसमें 26 अप्रैल को मॉकड्रिल में 22 मरीजों की मौत होने का दावा किया। वीडियो आने के बाद लोग सिहर उठे। प्रशासनिक जांच हुई, अस्पताल सील किया, लेकिन इनकी मौत का सच सामने नहीं आया। प्रशासन ने जांच में क्लीन चिट दे दी, आईएमए ने भी पांच सदस्यीय कमेटी ने प्रकरण की जांच की, लेकिन आईएमए ने जांच रिपोर्ट दबा दी, इसे सार्वजनिक नहीं किया।
तीसरी लहर में टीके ने बचाई जान, 64 मरीज ही हुए भर्ती
कोरोना वायरस की तीसरी लहर में टीकाकरण बेहद प्रभावी रहा। जिले के 18 साल से अधिक उम्र के 33.97 लाख लोगों को करीब शतप्रतिशत टीके का पहला डोज लग गया था। 22 लाख से अधिक लोगों के टीके की दोनों खुराक लग गईं थी। इसका ही असर रहा कि एसएन मेडिकल कॉलेज में महज 64 मरीजों को भर्ती होने की जरूरत पड़ी। इसमें भी टीबी, कैंसर, हृदय रोग जैसी गंभीर मर्ज से पीड़ित थे।
टीका जरूर लगवाएं
जिला टीकाकरण प्रभारी के डॉ. संजीव वर्मन ने कहा कि घरों से थोड़ी दूरी पर ही टीकाकरण केंद्र बनाए हैं। लोगों से अपील है कि वह टीकाकरण जरूर करवा लें। अगर घर में बुजुर्ग हैं तो उनको भी टीका लगाएं। टीका ही असल में सुरक्षा कवच बना हुआ है।
बचाव के सारे उपाय करें
अध्यक्ष आईएमए डॉ. राजीव उपाध्याय ने कहा कि कोरोना वायरस से जंग में आम आदमी की भूमिका भी है। लोग बेवजह भीड़भाड़ में न जाएं। खुद को फिट रखने के लिए पौष्टिक आहार लें। योग-व्यायाम की आदत डाल लें। बचाव के सारे उपाय जरूर करें।
कोरोना के दो साल
- पहला संक्रमित : तीन मार्च 2020
- पहली संक्रमित मौत : सात अप्रैल 2020
- पहली बार टीकाकरण : 16 जनवरी 2020
- पहली संक्रमित गर्भवती का प्रसव: 20 अप्रैल 2020
- दो साल में यह है स्थिति:
- 2465223 नमूनों की हुई जांच
- 36131 लोग मिले संक्रमित
- 35611 लोग ठीक हो गए
- 464 संक्रमितों की हुई मौत
- 1.28 प्रतिशत संक्रमित की दर
- 98.56 प्रतिशत ठीक होने की दर
- 1.46 प्रतिशत मौत की रही दर