आगरा में मेयर और अफसरों के घरों के आसपास नाले-नालियां प्री-कास्ट स्लैब से ढकी हैं, जबकि कई आम बस्तियों में 15 फीट तक गहरे नाले खुले पड़े हैं। फ्रीगंज में खुले नाले में बुजुर्ग महिला की मौत के 24 घंटे बाद भी स्लैब नहीं रखे जाने से नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
एक ही शहर की यह दो तस्वीरें हैं, जहां अलग-अलग दुनिया बसती है। एक ओर तो अफसरों के आवासों के आसपास के इलाके हैं, जहां की सड़कें शानदार हैं। रोशनी की जगमग है और नाले, नालियां भी प्री-कास्ट स्लैब से ढकी हुई हैं। दूसरी ओर आम लोगों की बस्तियों में नाले खुले पड़े हैं। जहां लोग गंदगी के बीच दमघोंटू माहौल में जी रहे हैं। फ्रीगंज के चिम्मनलाल का बाड़े में बुजुर्ग शीला देवी की खुले नाले में गिरकर मौत के बाद भी प्री-कास्ट स्लैब नहीं रखवाए गए।
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मेयर हेमलता दिवाकर के सेक्टर-16 स्थित आवास और गुरु तेग बहादुर कॉलोनी स्थित कैंप कार्यालय के बाहर नालियों, नाले स्लैब से ढके हुए हैं। मेयर, नगर आयुक्त समेत निगम अधिकारियों के बंगलों और घरों के बाहर भूमिगत सीवर नेटवर्क, पक्की चमचमाती सड़कें और शानदार स्ट्रीट लाइटें लगी हुई हैं, वहीं फ्रीगंज, धूलियागंज, काजीपाड़ा, मंटोला, लोहामंडी, नाला कंसखार, गोकुलपुरा जैसे इलाकों में घर की दहलीज के बाहर ही 15 फीट तक गहरे नाले खुले पड़े हैं, जो हर दिन लोगों की सांसों में जहर घोल रहे हैं।
फ्रीगंज पार्षद पिंकी सोनी ने बताया कि मेयर, अफसरों के घर के सामने नाले-नालियां ढके हुए हैं, इसलिए उन्हें नाले से होने वाले हादसों की जानकारी ही नहीं है। 15 जून को मैंने नगर आयुक्त को नाला ढकने के लिए पत्र दिया मगर 70 दिन में भी नहीं हुआ।
मेयर हेमलता दिवाकर ने कहा कि मेरे घर की नाली पर पत्थर रखे थे, जो टूट गए तो निगम ने प्री-कास्ट स्लैब रखवा दिए। कैंप कार्यालय के सामने बना नाला स्लैब से ढका हैं, यह मैंने नोटिस नहीं किया। केवल घर नहीं, अन्य हिस्सों में नालों को ढकने की फाइलें पास करेंगे।
नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने बताया कि मैंने खुले पड़े नालों की रिपोर्ट मांगी है, जिन्हें सुरक्षा के लिहाज से ढकना बेहद जरूरी है। आबादी वाले क्षेत्रों में सबसे पहले नाले ढके जाएंगे। नालों को एक साथ नहीं ढक सकते। नालों की सफाई कराने के साथ ही इन्हें कवर कराया जाएगा। नालों की टूटी दीवारों की मरम्मत कराएंगे।