आगरा के बरहन में 28 साल पहले हुई डकैती के दौरान दंपती की हत्या के मामले में कोर्ट ने छह आरोपियों को दोषी पाया। दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं 1.40 लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया है। मामले में राजकुमार ने आठ सितंबर 1992 को मुकदमा दर्ज कराया था। घटना वाले दिन वह कमरे में सो रहे थे।
पत्नी नीलम, बहन गायत्री और उसकी सहेली सुधा चौहान भी सो रही थी। पिता श्याम बहादुर और मां महादेवी बरामद में सो रहे थे। रात तकरीबन 12:30 बजे 10-12 बदमाश घर में घुस आए थे। इस दौरान श्याम बहादुर और महादेवी की गोली मारकर हत्या कर दी। राजकुमार की बहन और पत्नी से मारपीट की। सुधा का पैर तोड़ दिया। राजकुमार का बेटा राहुल भी छर्रे लगने से घायल हो गया। बदमाशों ने घर से जेवरात और अन्य सामान लूट लिया।
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पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपियों को पकड़ा। इनमें सुम्मेरा, काली उर्फ कालीचरन, शिब्बो, लेखराज उर्फ लेखा निवासी टिकेत, थाना सकरौली (एटा), नियामत निवासी अहारन (बरहन) और चंद्रभान उर्फ चंद्रपाल निवासी अहारन के नाम प्रकाश में आए। पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजा। अपर जिला जज 18 मोहम्मद असलम सिद्दीकी ने छह आरोपियों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं 1.25 लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया। दोषियों में सुम्मेरा, काली, शिब्बो, लेखराज, नियामत और चंद्रभान उर्फ चंद्रपाल हैं।