मैनपुरी। सरकारी भूखंडों पर कोर्ट से लिए गए स्टे निरस्त कराए जाएंगे। शासन के निर्देश के बाद इन मुकदमों को सूचीबद्ध करके कार्रवाई शुरू कराने की जिम्मेदारी सिविल के सरकारी वकीलों को दी गई है। स्टे निरस्त कराकर संबंधित भूखंडों को ग्रामसभाओं के नाम दर्ज कराया जाएगा।
सरकारी भूखंडों पर कब्जा करने के बाद प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई से बचने के लिए कब्जा करने वाले लोग कोर्ट से एकतरफा स्टे ले लेते हैं। स्टे लेने के बाद सरकारी भूखंड पर निर्माण करने अथवा खेती करना शुरू कर देते हैं जिससे सरकार को राजस्व की हानि होती है। शासन स्तर पर पहुंची शिकायतों केे बाद इस तरह के मामलों में स्टे निरस्त कराने के लिए सिविल के सरकारी वकीलों को जिम्मेदारी दी गई है। शासन के आदेश के बाद न्यायालयों में इस तरह के मामलों को चिह्नित किया गया है। इन मामलों में सरकारी वकील अदालत में प्रशासन का पक्ष रखकर स्टे निरस्त कराने की कार्रवाई शुरू करेंगे। स्टे निरस्त कराने के बाद संबंधित भूखंडों को राजस्व अभिलेखों में ग्रामसभाओं के नाम दर्ज कराया जाएगा।
अदालत में लंबित 83 मामले
दीवानी न्यायालय में सिविल की अदालतों में 83 मामलों की पहचान की गई है। इन मामलों में एकतरफा स्टे लिया गया है। प्रशासन की ओर से इन मुकदमों में अपना पक्ष नहीं रखा गया है। अदालत के सामने प्रशासन का पक्ष अब इन मुकदमों में सरकारी वकीलों द्वारा रखा जाएगा।
सरकारी जमीनों पर एकतरफा स्टे से सरकार को नुकसान होता है। इस तरह के मुकदमों में अदालत के सामने प्रशासन का पक्ष रखकर स्टे निरस्त कराने केे बाद संबंधित भूखंडों को राजस्व अभिलेखों में ग्रामसभा के नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
अजीत कुमार सिंह, डीजीसी सिविल