दिल्ली की कडकड़ड़ूमा कोर्ट ने पुरातन शूकरक्षेत्र विकास मंच की याचिका पर प्रसिद्ध धार्मिक प्रकाशन गीता प्रेस, गोरखपुर को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने आगे इस मामले में अगली सुनवाई 15 जुलाई निर्धारित की है।
पुरातन शूकरक्षेत्र विकास मंच नामक संस्था के सदस्य दिल्ली निवासी प्रमोद कुमार तिवारी एडवोकेट ने एक याचिका दाखिल कर आरोप लगाया गया है कि गीता प्रेस द्वारा गोस्वामी तुलसीदास के जन्मस्थान के संबंध गलत जानकारी प्रकाशित की गई है। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि गोस्वामी तुलसीदास का वास्तविक जन्मस्थान सोरोंजी शूकरक्षेत्र है और इसके समर्थन में कई ऐतिहासिक एवं धार्मिक प्रमाण भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने गीता प्रेस गोरखपुर को 6 मई को नोटिस जारी कर 30 दिन के अंदर जवाब मांगा है जिसमें पूछा गया है कि आखिर इस तरह की गलत जानकारी कैसे और किस आधार पर प्रकाशित की गई। गोस्वामी तुलसीदास जिनकी ऐतिहासिक कृति रामचरितमानस आज भी करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। स्वयं गोस्वामी तुलसीदास ने मानस में अपनी जन्म भूमि शूकर क्षेत्र वर्णित की है, मैं पुनि निज गुरु सन सुनी कथा सो शूकरखेत समुझी नहीं तस बालपन तब अति रहेउ अचेत।
अनेक हिंदी साहित्य के विद्वानों ने भी अपने शोधों से तुलसी जन्मभूमि सोरोंजी शूकरक्षेत्र को सिद्ध किया है। सोरोंजी में तुलसीदासजी का गर्भगृह, गोस्वामी तुलसीदास की नर हरि पाठशाला, तुलसी स्मारक, ब्रिटिशकालीन गजेटियर्स आदि तमाम साक्ष्य तुलसी जन्म भूमि सोरों जी ही सिद्ध करते हैं।