मैनपुरी। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट जयप्रकाश की अदालत ने सभी थानाध्यक्ष, बीट प्रभारी और क्षेत्राधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अब अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से संबंधित मामलों में दाखिल होने वाले आरोपपत्र और अंतिम रिपोर्ट में विवेचक का नाम और पदनाम स्पष्ट रूप से लिखना अनिवार्य है। साथ ही उन्हें स्वयं अदालत में आकर ये दस्तावेज दाखिल करने होंगे। अदालत ने पाया कि कई मामलों में विवेचक के नाम का उल्लेख जानबूझकर नहीं किया जा रहा है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि अभियुक्तों को अनुचित संरक्षण दिया जा रहा है और विवेचक अपने कर्तव्य का दुरुपयोग कर रहे हैं। न्यायाधीश जयप्रकाश ने अपने आदेश में कहा कि जब अदालत अंतिम आख्या को अस्वीकार कर अभियुक्त के खिलाफ संज्ञान लेती है, तो विवेचक का नाम नहीं होने से यह पता नहीं चल पाता है कि जांच किस अधिकारी ने की है, जो मामले के विचारण के लिए एक आवश्यक तथ्य है।
अदालत के आदेश की दो मुख्य बातें : अदालत में एक रजिस्टर रखा जाएगा जिसमें विवेचक का नाम, पदनाम और हस्ताक्षर दर्ज किए जाएंगे।जिन मामलों में अंतिम आख्या में विवेचक का नाम नहीं होगा, उन पर अदालत समय पर संज्ञान लेगी और पदीय कर्तव्य की अवहेलना के लिए संबंधित शासन/विभाग को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।