आगरा में पुलिस टीम पर फायरिंग और मुठभेड़ के मामले में आरोपी 25 हजार रुपये के इनामी हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव को जिला जज ने जमानत दे दी। मोनू यादव का नाम पहले रंगदारी मांगने और चर्चित हत्या प्रकरण से जुड़े आरोपों को लेकर भी सुर्खियों में रहा है।
आगरा पुलिस टीम पर हमले और अन्य आरोपों के मामले में ट्रांस यमुना थाना क्षेत्र के कालिंदी विहार नगला रामबल निवासी मनोज यादव उर्फ मोनू यादव ने अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। जिला जज सुजय कुमार मलिक ने रिहाई के आदेश दे दिए।
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थाना ट्रांस यमुना में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, थाना प्रभारी हरेंद्र कुमार ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 3 मई को वह पुलिस टीम के साथ थाना क्षेत्र में इलाके में गश्त कर रहे थे। पता चला कि 25 हजार का इनामी हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव क्षेत्र में घूम रहा है। टीम के साथ झरना नाले पहुंचे। चेकिंग के दौरान आरोपी मोनू यादव को बाइक रोकने के इशारा किया पर उसने पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी, जिससे पुलिस वाले बाल-बाल बच गए।
जवाबी कार्रवाई में आरोपी मोनू पैर में गोली लगने से घायल हो गया। जमानत प्रार्थना पत्र की सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने तर्क दिए कि घटना में कोई पुलिस कर्मी घायल नहीं हुआ। बरामदगी का कोई स्वतंत्र गवाह भी नहीं है।
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ढाबा संचालक से मांगी थी रंगदारी
राज चौहान की हत्या में उनकी मां ने मोनू पर संलिप्तता का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। पुलिस को भी इस मामले में खठघरे में खड़ा किया था। 17 अप्रैल को रामबल निवासी ढाबा संचालक से 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में मोनू सहित 6 आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी।