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जज ने मर्डर केस में पहले किया घटनास्थल का निरीक्षण, फिर सुनाया ये बड़ा फैसला

Wed, 21 Mar 2018 10:10 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा
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court
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मथुरा में 10 अगस्त 2016 से पत्नी की हत्या के आरोप में बंद पति को एफटीसी प्रथम कोर्ट ने बरी कर दिया। वहीं, उसके खिलाफ केस दर्ज कराने वाली वादी और दो अन्य के खिलाफ झूठी गवाही देने पर केस दर्ज करने के आदेश दिया है। 
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इस मामले में कोर्ट ने घटना स्थल का निरीक्षण करने के बाद निर्णय सुनाया है। इस्कॉन के अनुयायी रूसी युवक व्यूगिन ब्लाडी स्लॉव ने वर्ष 2006 में वृंदावन निवासी श्याम लता से विवाह किया था। 

गत 31 जुलाई 2016 को श्याम लता का शव घर में पंखे पर फंदे में लटका पाया गया था। इस संबंध में श्याम लता की मां राजवती ने मृतका के पति व्यूगिन ब्लाडी स्लॉव के खिलाफ वृंदावन कोतवाली में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 
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high court
पुलिस ने स्लॉव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मामले में सुनवाई करते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने सोमवार को निर्णय सुनाया। 

उन्होंने व्यूगिन ब्लाडी स्लॉव को बरी कर दिया और उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने वाली मृतका की मां राजवती, भाई गिरीश और मृतका की बेटी जुगल किशोरी के खिलाफ झूठी गवाही में रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं। 

कोर्ट ने मृतका का पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक के संबंध में डायरेक्टर जर्नल ऑफ हेल्थ को निर्देश दिए हैं कि उन्हें पोस्टमार्टम करने की बेसिक ट्रेनिंग दी जाए। 
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साजिश के तहत फंसाया गया था

अहम बात यह है कि न्यायाधीश ने निर्णय देने से पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया साथ ही सीसीटीवी फुटेज का भी देखा। प्रतिवादी पक्ष की और से अधिवक्ता रवि शंकर उपाध्याय, उमाकांत चतुर्वेदी ने पैरवी की। 

अधिवक्ता रवि शंकर उपाध्याय ने बताया कि स्लॉव को साजिश के तहत फंसाया गया था। मृतका ने जब फांसी लगाई थी, तब स्लॉव घर पर मौजूद नहीं था।
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