लॉरेंस और दीपक मीणा जेल में बंद थे, जबकि दीपक मीणा की जमानत हो चुकी थी। वह अन्य मामले में जेल में बंद है। इस संबंध में जानकारी देते हुए एडीजीसी सूर्यवीर सिंह ने बताया कि अदालत के समक्ष चश्मदीद सभी आठ गवाव पक्षद्रोही हो गए। जिसके चलते अदालत ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया और जेल से रिहा होने के आदेश दिए है।
जेल प्रशासन हुआ पक्षद्रोही
जेल में हुई वारदात के दौरान चश्मदीद रहे जेल सुपरिटेंडेंट राकेश कुमार, जेलर आकाश शर्मा, डिप्टी जेलर सुरेश कुमार, आरक्षी दिलीप कुमार, उदयवीर सिंह, दिलासाराम अधिवक्ता लवेश शर्मा, मुकेश चूड़ामणि सभी गवाह पक्षद्रोही हो गए। इनमें जेल प्रशासन के साथ-साथ सिम विक्रेता तक गवाही में शामिल थे । इस पूरे मामले में कुल 22 गवाह थे। जिनमें 8 गवाह चश्मदीद थे जबकि अन्य गवाह पुलिस प्रक्रिया में शामिल गवाह थे।