आगरा। खुले पड़े नालों में एक माह में तीन लोगों की जिंदगी समा गई। हर बारिश में सड़कें नहर बन गईं और घरों में पानी भर गया। सड़कों के धंसने और गहरे गड्ढों की शिकायतें आ रही हैं। ऐसे में इन सवालों के बीच पार्षदों ने बुधवार को घोषित सामान्य सदन के लिए 135 प्रस्ताव लगाए लेकिन मेयर हेमलता दिवाकर ने एक दिन पहले मंगलवार को सदन के सामान्य अधिवेशन को स्थगित कर दिया।
इस पर भाजपा से लेकर बसपा तक के पार्षदों ने मेयर पर सवाल उठाए और कहा कि 19 की जगह केवल 6 सदन ही पूरे कार्यकाल में हुए हैं। वह कहां अपनी आवाज उठाएं। भाजपा के सबसे वरिष्ठ पार्षद रवि माथुर ने कहा कि नालों की सफाई हुई नहीं। हर वार्ड में 10 सफाईकर्मियों को देने के आदेश का अब तक पता नहीं। सदन और कार्यकारिणी में लिए गए निर्णयों की अवहेलना हो रही है।
ऐसे में सदन स्थगित करने का निर्णय ठीक नहीं है। जनता जलभराव, गंदगी, गड्ढों, सीवर उफनाने की समस्या झेल रही है। खुले नालों में तीन जानें जा चुकी हैं और दर्जनों गिरकर बाल-बाल बचाए गए हैं। इन पर चर्चा के लिए सदन का अधिवेशन बुलाना चाहिए, जिससे अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सके।
बसपा पार्षद बोले- नियम विरुद्ध है स्थगन
बसपा के पार्षदों ने सदन स्थगित करने पर नाराजगी जताई और मेयर के फैसले पर सवाल उठाया। पार्षद दल नेता कप्तान सिंह ने कहा कि सूचना जारी होने के बाद सदन में आकर ही इसे स्थगित किया जा सकता है, लेकिन मेयर हर बार दो से तीन बार स्थगित करने के बाद सदन बुला रही हैं। साढ़े तीन साल में केवल 6 अधिवेशन हुए हैं, जबकि 19 होने चाहिए थे। हर दो माह में एक अधिवेशन होना चाहिए। हर माह कार्यकारिणी होनी चाहिए, लेकिन महीनों तक नहीं होती।
पार्षद सुहैल कुरैशी ने कहा कि यह पार्षदों के साथ धोखा है। सफाई, गंदगी, स्ट्रीट लाइट, खुले नालों में मौत, जलभराव, सफाई घोटाले पर चर्चा की जरूरत थी। 135 प्रस्ताव लगे हैं। अगर हर दो माह में सदन होगा तो इनकी संख्या घट जाएगी। बसपा पार्षदों बंटी माहौर, पिंकी सोनी, रेखा भास्कर, गंगाराम माथुर, मो. आसिफ, राजीव पटेल आदि ने अधिवेशन जल्द बुलाने की मांग की।