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UP: सील्ट बेल्ट लगाकर चलाएं कार...तीसरी नजर से बचना नहीं आसान, 15 दिन में साढ़े तीन हजार से ज्यादा चालान

Sat, 21 Dec 2024 11:53 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

कार चलाते समय यदि सील्ट बेल्ट लगाने की आदत नहीं हैं, तो सावधान हो जाएं। तीसरी नजर आपके ऊपर है, जिससे बचना आसान नहीं है। सीसीटीवी के माध्यम से 15 दिन में साढ़े तीन हजार से ज्यादा चालान हुए हैं। 
 
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कार चालक का चालान करते ट्रैफिक पुलिसकर्मी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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सीट बेल्ट लगाए बिना कार चला रहे हैं तो चालान से बच नहीं पाएंगे। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) की मदद से किए गए चालान लोगों के घर तक पहुंचने लगे हैं। इंटीग्रेटेड ट्रेफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के तहत शहर में एआई आधारित कैमरे हर गाड़ी चालक की गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं। सेंटर से 3500 से ज्यादा चालान किए जा चुके हैं। 1 से 15 दिसंबर तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि नगर निगम स्मार्ट सिटी कार्यालय से संचालित एआई आधारित कैमरे कैसा काम कर रहे हैं। चार पहिया वाहन चालकों के सीट बेल्ट न लगाने पर 3542 मामले सामने आए हैं। ट्रैफिक पुलिस इनमें से 523 वाहन चालकों को चालान भेज चुकी है। सीट बेल्ट नहीं लगाने वाले वाहन चालकों पर नजर रखने के लिए इसी माह से ये व्यवस्था शुरू की गई है।
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नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने बताया कि आईटीएम सिस्टम में जो कैमरे इंस्टाल कराए गए थे, उन्हीं के माध्यम से ई-चालान जेनरेट हो रहे हैं। आगरा नगर निगम प्रदेश में पहली बार इस तकनीक का उपयोग सीट बेल्ट नहीं लगाने वाले वाहन चालकों के लिए किया जा रहा है।

आईटीएमएस से संचालित हो रहे 110 कैमरे
हाई डेफिनेशन फुटेज के माध्यम से गाड़ियों में चालकों और यात्रियों की स्थिति का विश्लेषण इन कैमरों के माध्यम से किया जाता है। जब भी कोई वाहन चालक बिना सीट बेल्ट के नजर आता है ये कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट को स्कैन कर आटोमैटिक उसका चालान जारी कर देते हैं। शहर में 110 ऐसे कैमरे संचालित हैं।
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पुलिस से वाहन चालकों से होने वाले विवादों में कमी
स्मार्ट सिटी की इस पहल से ट्रैफिक पुलिस का काम आसान होने के साथ ही आए दिन चालान आदि को लेकर वाहन चालकों के साथ होने वाले विवादों में भी खासी कमी आई है। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते पकड़े जाने पर अक्सर वाहन स्वामियों और पुलिस के बीच तकरार होने के मामले प्रकाश में आते रहते थे। लेकिन इस सिस्टम में वाहन स्वामी को पता ही नहीं चल पाता है उसने कब और कहां पर गलती कर दी। चालान घर पहुंचता है तभी उसे इसका पता चल पाता है।
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