जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि शासन स्तर तक होगा इस प्रस्ताव का विरोध
निगम में शामिल हुए तो कई ग्राम पंचायतें हो जाएंगी अपने अधिकार से वंचित
जिला पंचायत ने नगर निगम के सीमा विस्तार के प्रस्ताव का विरोध किया है। शुक्रवार को जिला पंचायत अध्यक्ष कुशल यादव ने कहा कि नगर निगम ने मनमाने तरीके से सीमा विस्तार का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव के आधार पर सीमा विस्तार होता है तो ग्रामीणों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इसका विरोध शासन स्तर तक किया जाएगा।
शुक्रवार को आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष कुशल यादव ने कहा कि ग्राम पंचायतों के नगर निगम की सीमा में शामिल होने से ग्रामीणों पर अनावश्यक करों का बोझ बढ़ेगा। ग्राम पंचायतों के विकास के लिए जो धनराशि प्राप्त होती है वह पर्याप्त है लेकिन निगम सीमा में आने के बाद उस अनुपात में धनराशि नहीं आएगी। इससे ग्राम पंचायत विकास से अछूती रह जाएंगी। वर्तमान में ग्राम पंचायतों के प्रधानों के पास जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र एवं अनेक समस्याओं के समाधान के लिए तमाम अधिकार हैं। नगर निगम सीमा में आने के बाद ग्रामीण इन सुविधाओं से वंचित रह जाएंगे। 1982 में जो ग्राम पंचायतें निगम में शामिल की गई थीं, उनका अभी तक विकास नहीं हो पाया है। निगम सीमा में आने के बाद कृषि भूमि का अधिग्रहण होेगा। सामान्यत: अधिग्रहण में किसानों को सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मिलता है लेकिन निगम सीमा में आने के बाद वे इस अधिकार वंचित से हो जाएंगे।
जिला पंचायत का विशेष सदन बुलाया
नगर निगम के सीमा विस्तार के प्रस्ताव के विरोध में जिला पंचायत कुशल यादव ने विशेष सदन की बैठक बुलाई है। उनका कहना है कि जिला पंचायत सदन निगम से बड़ा सदन है। 18 जुलाई को विशेष सदन की बैठक होगी जिसमें निगम के सीमा विस्तार के एजेंडे पर चर्चा होगी। कुशल यादव ने कोशिश होगी जिला पंचायत सदन एकराय होकर इस प्रस्ताव का विरोध कर शासन को भेजे। यह लड़ाई शासन तक लड़ी जाएगी।