आगरा के क्वारंटीन सेंटरों में ‘सेहत के सिपाहियों’ को पौष्टिक भोजन नहीं मिल पा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का डायट चार्ट भी नहीं अपनाया जा रहा। भोजन मिलने का समय भी तय नहीं है।
कोरोना वायरस के मरीज और संदिग्धों के इलाज में एसएन मेडिकल कॉलेज के 70-80 लोगों का स्टाफ लगा है। इसमें चिकित्सक, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय, फार्मासिस्ट, सफाईकर्मी शामिल हैं।
यह सब लोग अलग-अलग क्वारंटीन सेंटर में ठहरे हुए हैं। ड्यूटी खत्म होने के बाद इनको समय पर नाश्ता और भोजन नहीं मिल पा रहा है। खाने में सब्जी, दाल, सूखी रोटी दी जा रही हैं। दूध और फल नहीं मिल रहे हैं।
कैंटीन से दिया जा रहा भोजन
प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा का कहना है कि चिकित्सकीय स्टाफ को तय डायट देने के निर्देश हैं। शुरुआत में दिक्कत थी, अब कॉलेज की कैंटीन से ही भोजन दिया जा रहा है। इसकी खुद पड़ताल करता हूं।
होटलों में बने क्वारंटीन सेंटर में रहने वालों का आरोप है कि कर्मचारी सफाई करने नहीं आ रहे हैं। गंदगी भी है। भोजन भी समय पर नहीं मिल पा रहा है।
किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ में डायट चार्ट
सुबह छह से सात बजे: हल्दी मिला एक गिलास दूध, दो बादाम, एक अखरोट, आधी कटोरी भुना मखाना।
नाश्ता सुबह आठ से नौ बजे: दो परांठे, मौसमी सब्जी, एक कटोरी दलिया या पोहा, एक फल, 50 ग्राम पनीर, एक कटोरी चना, अंकुरित मूंग में से एक सामग्री।सुबह 11 बजे: एक कप चाय जिसमें अदरक, तुलसी, लोंग, काली मिर्च, नींबू मिला हो।
दोपहर 12 से एक बजे: दो रोटी, दाल, हरी सब्जी के अलावा दही, मट्ठा, उबला अंडा, पनीर में से एक कोईसामग्री।
शाम चार बजे: एक कप चाय, तुलसी-अदरक वाली।
शाम पांच-छह बजे: भुना चना, हलुआ, मखाना में से एक सामग्री और चाय।
रात का खाना: दोपहर की तरह।
सोते समय: हल्दी मिला हुआ एक गिलास दूध।