आगरा में कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच सामान्य रोगियों के इलाज में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए निजी अस्पतालों को चिन्हित किया गया है। अगर कोई चिह्नित अस्पताल मरीज को भर्ती करने या उपचार करने से मना करता तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा।
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने शुक्रवार को यह सख्त निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि अलग-अलग बीमारियों के लिए 25 अस्पताल चिह्नित हैं। इनमें मरीजों को भर्ती व इलाज नहीं मिलने की शिकायतें आई हैं। इसके लिए आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की दो टीमें बनाई हैं।
सीडीओ नोडल अधिकारी होंगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अस्पताल आने वाले प्रत्येक रोगी को इलाज मिले। अगर कोई अस्पताल मरीज को भगाएगा या इलाज नहीं देगा, तो उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी।
मरीज को कोरोना का वाहक समझकर करें उपचार
जिलाधिकारी ने बताया कि अस्पताल आने वाले प्रत्येक सामान्य रोगी को डॉक्टर कोरोना का वाहक समझें। उन्हें लगता है तो उसकी कोरोना जांच कराएं लेकिन मरीज के इलाज से कोई अस्पताल इनकार नहीं कर सकता।
ये अस्पताल हैं चिह्नित
- क्रिटिकल केयर के लिए पुष्पांजली हॉस्पिटल देहली गेट, लोटस हॉस्पिटल दीवानी चौराहा, रेनबो हॉस्पिटल सिकंदरा, शांति मांगलिक फतेहाबाद रोड, जीजी नर्सिंग होम संजय प्लेस चिह्नित हैं।
- हीमो डायलिसिस के लिए सिनर्जी हॉस्पिटल, नयति हॉस्पिटल, रामरघु, जयदेवी हॉस्पिटल, समर्पण ब्लड बैंक, डॉ. एमएल पटनी। इनके अलावा कई क्रिटिकल केयर वाले अस्पतालों में भी डायलसिस होगी।
- कैंसर रोगियों की कीमोथैरिपी के लिए एसएन मेडिकल कॉलेज व पुरुषोत्तम दास कैंसर हॉस्पिटल चिह्नित हैं।
चार मरीजों की जा चुकी है जान
एसएन मेडिकल कॉलेज में गैर कोरोना रोगियों इलाज पर रोक के बाद निजी अस्पतालों ने भी उन मरीजों से दूरी बना ली। इस कारण पिछले छह दिन में चार मरीजों की जान चली गई।
1. सिकंदरा निवासी सेवानिवृत्त अधिकारी की डायलिसिस नहीं होने से मौत हुई।
2. टेढ़ी बगिया निवासी युवक दादा के इलाज के लिए भटकता रहा। दादा ने बाद में दम तोड़ दिया।
3. ट्रांसयमुना स्थित अस्पताल में महिला की इलाज नहीं मिलने से जान गई।
4. अर्जुन नगर स्थित एक अस्पताल में प्रसूता को भर्ती नहीं करने पर उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई।