आगरा में कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रति जागरूकता यह है कि लोग जुकाम, खांसी होने पर निजी और सरकारी अस्पतालों में जांच कराने पहुंच रहे हैं। जुकाम-खांसी की परेशानी से पीड़ित 70 फीसदी मरीज यही आशंका जता रहे हैं।
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जिला अस्पताल और एसएन मेडिकल कॉलेज में बुखार, जुकाम-खांसी की ओपीडी में औसतन रोजाना 350 से 450 मरीज आ रहे हैं। इनको दो-तीन दिन से जुकाम-खांसी होता है।
कोरोना वायरस की आशंका पर ओपीडी में दिखाने आने पर डॉक्टर इनकी ट्रेवलिंग हिस्ट्री जानने और अन्य लक्षणों का आकलन करने पर उनको समझाते हैं कि मौसमी जुकाम-खांसी है।
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एसएन में मेडिसिन विभाग के डॉ. मनीष बंसल ने बताया कि इस समय वायरल फीवर भी चल रहा है, जुकाम-खांसी ही कोरोना वायरस का लक्षण नहीं है। ऐसे मरीज घबराएं नहीं, ओपीडी में भी चिकित्सकीय पड़ताल के बाद समझाया जा रहा है।
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सावधानी बरतने की कहते हैं लोगों को: डॉ. यूसी गर्ग
मनोचिकित्सक डॉ. यूसी गर्ग ने बताया कि कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के चलते अधिकांश समय इसकी ही बातें हो रही हैं। इससे लोग कोरोना वायरस फोबिया के शिकार हो गए हैं।
ऐसे मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। खांसी, छींक आने पर लोग चिंतित हो रहे हैं, सबसे ज्यादा बच्चों को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। ऐसे लोगों की काउंसलिंग कर सावधानी बरतने को कहा जा रहा है।
जुकाम, खांसी के अधिक मरीज: डॉ. पीके माहेश्वरी
एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. पीके माहेश्वरी ने बताया कि खांसी, गले में खराश होने पर मरीज कोरोना की आशंका जताकर इनकी जांच पर जोर देते हैं।
ओपीडी में ऐसे लोग ज्यादा आ रहे हैं। इनकी पड़ताल के बाद मौसमी जुकाम-खांसी बताते हैं, दवा के साथ गुनगुना पानी पीने और ठंडी सामग्री के उपयोग से बचने की सलाह भी दे रहे हैं।
आईएमए सचिव डॉ. संजय चतुर्वेदी ने बताया कि कोरोना वायरस को लेकर लोगों में खौफ है, लेकिन उतनी सावधानी नहीं बरत रहे। आइएमए हेल्पलाइन और डॉक्टरों के पास जुकाम-खांसी के 65 से 70 फीसदी मरीज यही कहते हैं कि भीड़ में गया था, किसी ने खांस दिया और मुझे भी खांसी हो गई, कहीं यह कोरोना तो नहीं है। जांच कहां करवाएं।