जिले में एसएन मेडिकल कॉलेज व जालमा कुष्ठ रोग संस्थान में 350 सैंपल रोजाना जांच करने की क्षमता है, फिर भी औसतन हर दिन 150 से 200 सैंपल लिए जा रहे हैं। ये सैंपल पॉजिटिव कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग और निजी अस्पतालों में भर्ती गर्भवती, सांस, अस्थमा, गुर्दा और हृदय रोगियों के अधिक हैं।
छह घंटे में होनी थी कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग
आगरा के नोडल अधिकारी व प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने छह घंटे में पॉजिटिव की कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग व सैंपलिंग कर 24 घंटे में टेस्ट रिपोर्ट उपलब्ध कराने के आदेश दिए, लेकिन अब कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग से सैंपलिंग में 24 से 36 घंटे लग रहे हैं। सैंपल कलेक्शन के लिए एक दिन पहले सूची बनती है, फिर दूसरे दिन सैंपल कलेक्शन हो रहा है।
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह का कहना है कि पहले केस अधिक मिल रहे थे। उनके सभी कॉन्टेक्ट की सैंपलिंग होती थी। ज्यादा केस थे, तो संपर्क में आए लोग ज्यादा थे, इसलिए सैंपल ज्यादा थे।
अब पॉजिटिव केस कम हैं, उनके कॉन्टेक्ट भी कम हुए, इसलिए सैंपलिंग भी कम हुई। अब स्मार्ट सैंपलिंग हो रही है। पॉजिटिव की कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग कर पहले उसका घर सैनिटाइज कराते हैं। 18 घंटे से पहले सैंपलिंग हो जाती है।
ये भी सवाल उठ रहे
1. जब सैंपलिंग ही नहीं होगी, तो पॉजिटिव केस कहां से मिलेंगे ?
2. जब लैब ज्यादा जांच कर सकती हैं तो सैंपल कम क्यों लिए जा रहे हैं?
3. दो निजी लैब में जांच बंद कराई तो उनकी जगह दूसरी में शुरू क्यों नहीं कराई ?
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