आगरा में चार लोग एक बार ठीक होने के बाद फिर से कोरोना संक्रमित हो गए। इनमें बड़ा खतरा यह सामने आया है कि चारों में ठीक होने के बाद खांसी-बुखार सहित कोरोना का कोई लक्षण नहीं आया। किसी ने परीक्षा देने के लिए जांच कराई तो किसी ने ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए। चार में दो मरीज हैं। एक ने कीमोथेरेपी के लिए जांच कराई और दूसरे ने डायलिसिस के लिए।
जाहिर है कि इन्हें जरूरत पड़ी तो जांच करा ली। अगर आवश्यकता नहीं पड़ती या थोड़े दिन बाद पड़ती तो इनके संक्रमित होने के बावजूद किसी को इसका पता नहीं चलता। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. आरसी पांडेय ने बताया कि दोबारा कोरोना संक्रमण होने के मामले मिले हैं, इनमें एंटीबॉडी भी नहीं बनी थी। लेकिन हालत इनकी सामान्य थी।
ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए जांच कराई तो पता चला
एसएन मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग के 49 साल के वार्ड ब्वाय ड्यूटी के वक्त संक्रमित हो गए, एसएन में ही भर्ती रहे। डिस्चार्ज होने पर क्वारंटीन में समय बिताने के बाद ड्यूटी ज्वाइन के वक्त मेडिकल बोर्ड ने दोबारा जांच कराई तो रिपोर्ट फिर पॉजिटिव आई।
ठीक होने के बाद परीक्षा देनी थी, रिपोर्ट पॉजिटिव आई
एसएन मेडिक्ल कॉलेज की एमबीबीएस की 22 साल की छात्रा जून में कोरोना वायरस से संक्रमित हो गई थी। वह फरीदाबाद की रहने वाली हैं। बीते दिनों परीक्षा देने के लिए कॉलेज आईं, यहां परीक्षा देने से पहले दोबारा जांच में संक्रमित पाई गईं।
कीमोथेरेपी के लिए कराई जांच, संक्रमित मिले
धनौली के 55 साल के कैंसर रोगी एसएन के कैंसर रोग विभाग में कीमोथेरेपी कराने के लिए आए थे। कीमो से पहले उनकी कोरोना की जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। कैंसर के यह मरीज जुलाई में भी कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके थे।
डायलिसिस से पहले जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई
मथुरा के 54 साल के किडनी मरीज मई में डायलिसिस कराने के लिए आए तब जांच में संक्रमित पाए गए, इनको एसएन में भर्ती किया गया था। बीते महीने फिर फॉलोअप में जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई है ।
पहली बार में चारों में लक्षण थे : डॉ. प्रभात
एसएन मेडिकल कॉलेज में वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि दोबारा कोरोना संक्रमण के चार मामलों में पहली बार बुखार-खांसी के लक्षण थे, लेकिन दूसरी बार में कोई भी लक्षण नहीं था। न ही कोई परेशानी थी लेकिन जांच में संक्रमित मिले।
पहली बार एंटीबॉडी में नहीं बने: डॉ. आरती
एसएन मेडिकल कॉलेज की माइक्रो बायलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि कुछ लोगों में पहली बार एंटीबॉडी नहीं बन पाते हैं। ऐसे में ये लोग किसी संक्रमित के संपर्क में आने से दोबारा संक्रमित हो जाते हैं। दूसरी वजह यह हो सकती है कि पहली बार में वायरस का लोड कम रहा हो, इसलिए रिपोर्ट निगेटिव आ गई हो।
दोबारा संक्रमण पर हो रहा है शोध: डॉ. आशीष
एसएन मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि दोबारा संक्रमण के कुछ मामले आए हैं, यह क्यों हो रहा है, इस पर विज्ञानी शोध कर रहे हैं। पहली बार वायरस कम प्रभावी होने पर रिपोर्ट निगेटिव और इसके प्रभावी होने पर दोबारा जांच में पॉजिटिव मिलती है।