मात्र 23 दिन... इतनी दिन में वह ठीक से मां का आंचल पकड़ना भी न जान पाया होगा। दुर्भाग्य देखिए, इतनी से उम्र में वह दुनिया की सबसे भयानक बीमारी का शिकार हो गया।
यह शिशु अब कोरोना से जंग लड़ रहा है। एसएन मेडिकल कॉलेज की कुशल चिकित्सकीय निगरानी और मां की ममता का साया उसकी ताकत हैं। और सबकी दुआएं भी...अब तक का सबसे नन्हा मरीज यह जंग जीते।
ताजगंज क्षेत्र का दंपती अभी तो अपने दूसरे बच्चे के जन्म की खुशियां भी जी भर न मना पाया था। लॉकडाउन के चलते छठी भी सादगी से हुई। इसी बीच सोमवार को पता चला कि वह कोरोना संक्रमित है तो पूरे परिवार के हाथ सलामती की दुआ में उठ गए। इन्हीं दुआओं के बीच शिशु देर रात एसएन मेडिकल कॉलेज लाया गया। यहां उसे मां के साथ एक अलग कमरे में रखा गया है।
चिकित्सा टीम का दुलारा
मां का साया हर वक्त
घातक संक्रमण का शिकार है, यह जानने के बाद भी मां ने अपने कलेजे के टुकड़े को सीने से लगा रखा है। कोई वायरस ममता का गला थोड़े घोंट सकता है। चिकित्सकों ने मां को सभी सावधानियां बताईं।
पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट (पीपीई) किट पहनाया। इसी किट में मां उसकी देखभाल कर रही है। अपने दूध से उसमें जंग जीतने की ताकत उड़ेल रही है। मां ने बताया कि शुरू-शुरू में पीपीई किट में वह उसे पहचान नहीं पाता था। लेकिन अब वह उसका स्पर्श पहचानने लगा है।
परिवार में दादा संक्रमित
परिजनों से पता चला कि शिशु के दादा मस्जिद में जाते थे। वहां कई जमाती भी आए थे। उनके संपर्क में आने से दादा संक्रमित हो गए। सर्विलांस टीम ने घर के सभी सदस्यों की जांच कराई।
माता-पिता या परिवार में अन्य कोई संक्रमित नहीं मिला। यह नवजात को लेकिन यह यह मर्ज लग चुका था। सोमवार को आई जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई। देर रात स्वास्थ्य विभाग की टीम शिशु को एसएन ले आया।
चिकित्सा टीम का दुलारा
आइसोलेशन वार्ड में तैनात डॉक्टर और दीगर स्टाफ के लिए यह नन्हा मरीज वीआईपी बन गया है। भर्ती की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उसे एक अलग कमरे में रखा गया। शुरू में मां बच्चे को स्तनपान भी नर्स की देखरेख में कराती थी ताकि वह जरूरी सावधानियों का पालन सीख सके।
मां को किसी मरीज सरीखा पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है ताकि बेटा भी स्वस्थ रहे। नर्स आदि भी उसका समय-समय पर हाल ले रही हैं। महिला से उसकी पसंद और जरूरतें भी पूछी जा रही हैं।