शहर की पॉश कॉलोनियों में हर 29वां शख्स संक्रमित मिल रहा है। इनमें मार्च से नवंबर तक 1.41 लाख नमूनों की जांच में 4800 की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है। इनमें भी शाहगंज, ताजगंज, विभव नगर, शास्त्रीपुरम में भी लगभग हर दिन संक्रमित मिल रहे हैं। दयालबाग, आवास विकास कॉलोनी, कमला नगर, खंदारी और सिकंदरा में भी लगभग यही स्थिति है। यहां नौ महीने में एक बार भी संक्रमण की चेन टूट नहीं पाई है।
सीएमओ डॉ. आरसी पांडेय ने बताया कि पॉश कॉलोनियों में संक्रमण की दर तेज है। इसकी वजह यह है कि यहां के लोगों का मूवमेंट ज्यादा है। यहां बाहर से ज्यादा लोग आ रहे हैं यहां के लोग बाहर निकल रहे हैं।
स्वास्थ्य सर्वे के प्रभारी डॉ. संजीव वर्मन ने बताया कि मार्च से अब तक आठ से दस पॉश कॉलोनी लगातार हॉटस्पॉट बनी हुई हैं। यहां पर टीम लगातार स्क्रीनिंग कर रही है, लोगों को दवाएं देकर जागरूक भी कर रहे हैं। जबकि नई कॉलोनियों में महीने में तीन से पांच ही मरीज मिल रहे हैं।
नई कॉलोनियों में 30 हजार की जांच में मात्र 230 पॉजिटिव
शहर की नई आबादी और कॉलोनियों में संक्रमण की दर पॉश कॉलोनियों के मुकाबले बहुत कम है। इन क्षेत्रों में 30 हजार लोगों की जांच में 230 संक्रमित मिले हैं। इस तरह औसतन 130 नमूनों की जांच में संक्रमण का एक मामला मिला।
यमुना पार, अर्जुन नगर, राजपुर चुंगी क्षेत्र में संक्रमण की रफ्तार कम
राजपुर चुंगी क्षेत्र, 100 फुटा रोड, अर्जुन नगर, खेरिया मोड़, मधु नगर, ग्वालियर रोड, शाहदरा, नुनिहाई, रुनकता, बिचपुरी रोड समेत शहर के प्रवेश मार्ग पर बनी नई कॉलोनियां शामिल हैं। चिकित्सकों का कहना है कि नई कॉलोनियों में ज्यादातर लोग देहात क्षेत्र से आकर बसे हैं। देहात के लोगों में प्रतिरोधक क्षमता अधिक है। यह भी एक कारण है कि यहां वारयस का प्रभाव पॉश कॉलोनियों जितना नहीं है।
आईएमए के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. राजीव उपाध्याय ने बताया कि शहर की नई बसावट में संक्रमण के मामले पॉश कॉलोनी के मुकाबले बहुत कम मिले हैं। पॉश कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की व्यापार, नौकरी समेत सामाजिक सरोकार अधिक होने के कारण फिजिकल कनेक्टिविटी अधिक रहती है। नई कॉलोनियों के लोगों की एक्टिविटी सीमित होने से यह अंतर मिल रहा है। दूसरा अंतर प्रतिरोधक क्षमता से आया है।