अगस्त में भले ही औसतन रोजाना 30 संक्रमित मरीज मिल रहे हों, लेकिन राहत की बात है कि मृत्यु दर में कमी आई है। इस महीने 17 दिन में चार की मौत हुई है, चार दिन में एक मौत का औसत है। जबकि जून-जुलाई में 54 दिन में 50 मरीजों ने दम तोड़ दिया था, एक दिन में एक का औसत था।
अभी तक संक्रमण के 2,355 मरीज और 104 की मौत हो गई है। इसमें पहले मृतकों की संख्या 50 होने तक में 98 दिन का समय लगा, लगभग दो दिन में एक मौत हो रही थी। उस वक्त लॉकडाउन था और संक्रमित मरीजों की संख्या 967 थी। दूसरे चरणों में लॉकडाउन खुलने के बाद संक्रमित मरीज और मृतकों की संख्या तेजी से बढ़ी। इस दौरान 54 दिन में 50 मरीजों ने दम तोड़ दिया और 1841 मरीज मिले।
एक अगस्त तक मरने वालों की संख्या 100 पहुंच गई। दो से 17 अगस्त के बीच सिर्फ चार मरीजों की मौत हुई और 514 मरीज संक्रमित पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वायरस के संक्रमित गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधा बेहतर हुई और लोग भी जांच समय पर करा रहे हैं।
नमूने लेने में सातवां और संक्रमण में 60वां स्थान
हाल ही में प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में संक्रमण की दर और नमूनों का आकलन कर रिपोर्ट जारी की है। इसमें सबसे ज्यादा नमूने लेने वालों में आगरा सातवें स्थान पर और संक्रमण मिलने में प्रदेश में 60वें स्थान पर है। अभी तक करीब 78 हजार लोगों के नमूने लिए गए हैं।
गंभीर रोगियों की जल्द जांच और इलाज से आई कमी: डॉ. आरसी पांडेय
सीएमओ डॉ. आरसी पांडेय का कहना है कि घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग, मल्टी विटामिन दवाएं दी गईं। कैंसर, टीबी, सांस, फेफड़े, मधुमेह, उच्च रक्तचाप के मरीजों में लक्षण नजर आने पर तत्काल जांच और इलाज की व्यवस्था से भी मृत्युदर में कमी आई है।
आइसोलेशन वार्ड में जीवनरक्षक दवाएं-उपकरण से मिली राहत: डॉ. संजय काला
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि आइसोलेशन वार्ड में वेंटिलेटर, बाइपेप मशीन, एचएफएनसी मशीन और दवाओं की उपलब्धता से इलाज आसान हुआ। समय पर जांच और जल्द अस्पताल में आने से भी मरने वालों में कमी आई है।
| तिथि |
मृतक |
दिन |
संक्रमित मरीज |
| 08 जून |
50 |
98 |
967 |
| एक अगस्त |
100 |
54 |
1841 |
| 17 अगस्त |
104 |
16 |
2355 |