एसएन के आइसोलेशन वार्ड में तैनात चिकित्सक
- फोटो : अमर उजाला
एसएन मेडिकल कॉलेज (सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज) के आइसोलेशन वार्ड में कोरोना वायरस से संक्रमित 38 मरीज भर्ती हैं। यहां से तीन मरीज ठीक होकर घर भी जा चुके हैं। इसके लिए दवा-डायट ही नहीं डॉक्टरों के हौसले की डोज भी कारगर साबित हुई है। मरीजों की रोज काउंसलिंग करने के साथ योग के लिए भी प्रेरित करते हैं।
आइसोलेशन वार्ड में तीन शिफ्टों में चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी है। इसमें तीन चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट वार्ड ब्वाय और सफाईकर्मी शामिल हैं।
दवा-भोजन की डायट चार्ट बनने के बाद चिकित्सकीय टीम की काउंसलिंग शुरू हो जाती है। दवा-भोजन, नाश्ता पहुंचाने के बाद चिकित्सक मरीजों को से हालचाल लेकर योग, ध्यान लगाने को कहते हैं।
एक-दूसरे के हालचाल से शुरू होती सुबह
आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीज परिवार की तरह रह रहे हैं। एक-दूसरे का हालचाल लेने से सुबह की शुरुआत होती है। एक-एक मीटर की दूरी का पालन करते हुए जल्द ठीक हो जाओगे, तुम तो काफी हिम्मती हो, इन बातों के जरिए एक-दूसरे को प्रोत्साहित करते हैं।
गीत गुनगुनाने, योग में बीत रहा समय
आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कोरोना वायरस के संक्रमित मरीज पसंदीदा संगीत सुनने के साथ योग भी कर रहे हैं। वॉटरवर्क्स क्षेत्र के चिकित्सक ने बताया कि दवा और भोजन के समय में नींद भी लेते हैं। सुबह पलंग पर ही योग और शाम को गायत्री मंत्र-हनुमान चालीसा और भजन सुनते हैं।
दवा से ज्यादा असर, डॉक्टरों की बातों का : डॉ. प्रशांत प्रकाश
आइसोलेशन वार्ड के प्रभारी डॉ. प्रशांत प्रकाश ने बताया कि कोरोना वायरस के मरीजों को मल्टी विटामिन, हेल्दी भोजन के साथ सबसे ज्यादा उनकी खुद की इच्छाक्ति भी असर डालती है। डॉक्टर हमेशा उनको सब ठीक है, जल्द तुम्हारी रिपोर्ट भी निगेटिव आएगी, इन बातों के जरिये सकारात्मक माहौल बनाते हैं।
वायरस की कम, सकारात्मक सोच की बातें ज्यादा : डॉ. एके सिंह
आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी दे रहे डॉ. एके सिंह ने बताया कि कोरोना वायरस के बजाए सकरात्मक बातें ज्यादा की जाती हैं। मरीजों के खाने-इलाज के डेप्लॉन के बाद उनको योग, एक-दूसरे का सपोर्ट करने, जल्द घर पहुंचेंगे आदि बातों के जरिये भी उनको प्रेरित करते हैं।